कान्हा जी
जीवन को हर ओर से छूना
आप सिखाते कान्हा जी।
जीवन को जीवंत हो जीना
ये बतलाते कान्हा जी।
गीता का उपदेश दे डाला
भोले मुरली वाले ने।
हर मन में है डेरा डाला
माखन चोर निराले ने।
पावन भाव से जो भी पुकारे
दौड़े आते कान्हा जी।
जो रखता बस उन पर भरोसा
युद्ध जिताते कान्हा जी।
भाव अगर हो निर्मल पावन
बिछ जाते हैं कान्हा जी।
धरा आज भी देख रही
थे दोस्त आपके सुदामा जी।
कलुषित हुआ जो भाव जरा सा
नहीं बचे थे मामा जी।
प्रेम धरा का अमर भाव है
जी के बताते कान्हा जी।
सुख दुख में सम भाव से रहना
स्थिति प्रज्ञ कहाते कान्हा जी।
रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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