158/2026, बाल कहानी- 10 सितम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 158/2026
*10 सितम्बर 2026 (बृहस्पतिवार)*
#बाल_कहानी- #महापुरुषों_से_सीख
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राखी प्राथमिक विद्यालय बौखर में कक्षा पाँच की छात्रा है। आज वह बहुत खुश है। आज उसको अपनी बड़ी बहन के साथ कालेज जाने का अवसर प्राप्त हुआ। उसकी बड़ी बहन मुस्कान ब्रह्मानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातक की स्टूडेंट है। महाविद्यालय में तेरह सितम्बर को स्वामी ब्रह्मानन्द जी के स्मृति दिवस के अवसर पर व्याख्यान माला एवं स्वामी ब्रह्मानन्द पुरस्कार समिति द्वारा विविध प्रकार के कार्यक्रम सम्पन्न होने है। प्रत्येक वर्ष शिक्षा एवं गौ सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए स्वामी ब्रह्मानन्द पुरस्कार प्रदान किया जाता है। यह सम्मान हर साल स्वामी ब्रह्मानन्द जी के परिनिर्वाण दिवस (13 सितम्बर) पर ब्रह्मानन्द महाविद्यालय में एक सम्मान समारोह के दौरान प्रदान किया जाता है। इसमें दस हजार रूपये नगद, एक प्रशस्ति पत्र, स्वामी ब्रह्मानन्द जी की कांस्य प्रतिमा, एक कांस्य पदक और अंग वस्त्र शामिल है।
वहाँ प्रवक्ताओं द्वारा व्याख्यान माला में स्वामी ब्रह्मानन्द जी के बारे में विस्तार से बताया गया। उनका जन्म 4 दिसम्बर सन् 1894 को हमीरपुर जिले की सरीला तहसील के बरहरा गाँव में किसान परिवार में हुआ। उनके बचपन का नाम शिवदयाल था। 24 साल की उम्र में परिवार का मोह त्याग कर हरिद्वार में हर की पौड़ी पर सन्यास लिया। तब शिवदयाल से स्वामी ब्रह्मानन्द बने।
महात्मा गाँधी, नेहरू, गणेश शंकर विद्यार्थी के सम्पर्क में रहे। सविनय अवज्ञा, नमक सत्याग्रह और रियासतों के मुक्ति आन्दोलनों में कई बार जेल गए। जीवन भर हाथ से पैसा नहीं छुआ। वेतन और पेंशन छात्र-छात्राओं के हित में दान कर दी। स्वामी ब्रह्मानन्द जी ने महात्मा गाँधी के साथ आजादी के आन्दोलनों में भाग लिया और गौहत्या निषेध के लिए काम किया। शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने पहले इण्टर कालेज की स्थापना की तथा बाद में महाविद्यालय की। वे सन् 1967 से सन् 1977 तक हमीरपुर से सांसद भी रहे। एक महान पुरूष के बारे में ये सब जानकर राखी को बहुत खुशी हुई। स्वामी जी जैसे महापुरुषों से सीख लेकर राखी ने अपने जीवन को आदर्श बनाने के लिए दृढ़ निश्चय किया। पढ़-लिखकर जीवन को समाज सेवा के लिए समर्पित करने हेतु राखी ने खुद को आश्वासन दिया।
#संस्कार_सन्देश -
हमें जीवन में महापुरुषों के आदर्श गुणों को अपनाना चाहिए एवं उनसे सीख लेते हुए उनके बनाये हुये मार्ग पर चलना चाहिए।
कहानीकार-
#मिथुन_भारती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बौखर
वि० क्षे०- सरीला, जनपद- हमीरपुर (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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