127/2026, बाल कहानी- 30 जुलाई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 127/2026
*30 जुलाई 2026 (गुरुवार)*
 #बाल_कहानी - #बाग_की_परी
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एक बाग में कुछ नन्हीं परियाँ घूम रहीं थीं। उनके रंग-बिरंगे परिधानों से ऐसा लग रहा था कि जैसे हर तरफ ही रंग बिखरे हुए थे।
शाम का समय था और आसमान में बादल छाये हुए थे। यदा-कदा कुछ नन्हीं बूँदें उनके गालों का स्पर्श करती हुई निकल जा रहीं थी और कोई कोई बूँद तो इतने कोमल फूल से गालों पर ही रुक जा रही थी उसे सहलाने के लिए। 
परियाँ यहाँ से वहाँ खिल-खिल करती चहक रहीं थीं। एक परी ने कहा, "सखियों! अब तो शाम भी गहरी होने लगी। बादल दादा भी गुस्से में लग रहे हैं। पता नहीं, कब उमड़-घुमड़ कर बरसने लगें? चलो, घर वापस चलते हैं। अन्यथा तो अन्धेरे में रास्ते में मुश्किल होगी और माँ भी चिन्ता करेंगी।"
दूसरी थोड़ी अधिक चंचल परी बोली, "चलते हैं दीदी! बस पाँच मिनट और...।" इस तरह करते-करते उन्होंने आधा घण्टा और लगा दिया। अब शाम रात में बदलने लगी थी और परियाँ थोड़ी डर रहीं थीं कि कैसे घर पहुँचेंगी? तभी पेड़ की ओट से एक बौना राक्षस निकला। उसके बड़े-बड़े दाँत थे और आँखें सुर्ख लाल, वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाता हुआ उन्हीं की तरफ चला आ रहा था। 
परियाँ डर के मारे एक-दूसरे से चिपक गईं और साँस थामकर अगले पल का इन्तजार करने लगीं। मन ही मन उन्हें अपनी माँ की सीख याद आ रही थी कि, "शाम होने से पहले घर लौट आना, नहीं तो तुम परेशानी में पड़ सकती हो।"
अब उन्हें अपने-आप पर गुस्सा भी आ रहा था। लेकिन अब पछताए होत क्या ? 
अब सब परी आँखें बन्दकर मन ही मन अपने ईश्वर को याद कर रहीं थीं और कह रहीं थीं, "इस बार बचा लो, आगे से हम बड़ों की बात माना करेंगे।"
इधर वह राक्षस बस हमला करने की ही फिराक में बैठा था कि अचानक जोर-जोर से हँसने की आवाज आने लगी। परियों ने डरते-डराते आँखें खोलने का प्रयत्न किया ।
और ये क्या?????......
ये तो उनका नटखट भाई 'बिंगो' था, जो अक्सर उन्हें किसी न किसी तरह परेशान करता रहता था।
उसने अपना मास्क हटाया और पास आकर बोला, "जल्दी घर चलो, माँ बहुत चिन्तित हैं।"
इस समय परियों को अपना ये शैतान भाई किसी देवदूत से कम नहीं लग रहा था, फिर भी नखरे दिखाने को बड़ी वाली ने एक जोर की चपत उसे लगायी और बोली, "तू कभी नहीं सुधरेगा। शैतान कहीं का। चल! जल्दी घर चलें।"
और इस तरह परियाँ और बिंगो हँसते-खिलखिलाते मोटरकार में बैठकर अपने घर चले गये।

#संस्कार_सन्देश -
हमें अपनों से बड़ों की बात माननी चाहिए, अन्यथा तो मुसीबत में पड़ सकते हैं।

कहानीकार - 
#पूनम_सारस्वत_'प्रज्ञा' (स०अ०) एकीकृत विद्यालय रुपा नगला, खैर, अलीगढ़

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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