119/2026, बाल कहानी- 21 जुलाई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 119/2026
*21 जुलाई 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी- #रक्षा_बन्धन
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रक्षा-बन्धन का पावन पर्व था। पूरा गाँव उत्सव के रंग में रंगा हुआ था। हर घर से हँसी-खुशी की आवाजें आ रही थीं। बहनें अपने भाइयों की कलाईयों पर प्रेम और विश्वास का प्रतीक राखी बाँध रही थीं। हर चेहरे पर मुस्कान थी लेकिन उसी गाँव के एक छोटे से घर में उदासी पहरी थी। वहाँ लाडो अपनी आँखों में उदासी लिए बैठी थी। "माँ ! मैं राखी किसे बाँधूँ?" उसने भर्राई हुई आवाज में पूछा, "मेरी सब सहेलियों के भाई हैं लेकिन मेरा कोई भाई क्यों नहीं है? हर साल जब भी ये त्यौहार आता है तो मुझे अपने भाई की कमी बहुत अखरती है मां!" लाडो ने अपनी मुट्ठी खोलकर रंग- बिरंगी राखी दिखायी।
"आज मेरी सारी सहेलियाँ कितनी खुश हैं। सब बाजार से राखी खरीद कर लायी हैं। मैंने भी अपनी सहेलियों के साथ राखी खरीदी है लेकिन मैं अब इस राखी का क्या करूँ?"
माँ ने लाडो को प्यार से गले लगाया और समझाया, "बेटा! हर रिश्ता हमें जन्म से नहीं मिलता, कुछ रिश्ते ईश्वर हमारे अच्छे कर्मों के कारण जीवन की राह में भेजता है। जिस दिन तुम्हें कोई ऐसा इन्सान मिलेगा, जो बिना किसी स्वार्थ के तुम्हारी रक्षा करेगा तो तुम समझ लेना कि तुम्हें तुम्हारा भाई मिल गया।" माँ की बात लाडो के मन में बस गई।
कुछ समय बाद एक दिन लाडो अपनी सहेलियों के साथ घाट के किनारे खेलने गयी, तभी अचानक उसका पैर फिसला गया और वह तेज बहाव में गिर गयी।
लाडो जोर-जोर से चिल्लाने लगी, "बचाओ...बचाओ...मैं डूब रही हूँ!" ये देखकर लाडो की सहेलियाँ भी घबरा गईं और मदद के लिए पुकारने लगीं लेकिन उन सब को तैरना नहीं आता था।
तभी वहाँ से गुजर रहे सनी ने उनकी आवाज सुनीं। उसने बिना एक पल भी गँवाए नदी में छलाँग लगा दी। तेज धार से संघर्ष करते हुए उसने लाडो को बचा लिया।
लाडो बेहोश थी। होश आने पर सहेलियों ने उससे सारी घटना बताई।
लाडो के मुँह से अनायास ही निकला,"भैया! मेरी माँ कहती थीं कि एक दिन तुमको तुम्हारा भाई अवश्य मिलेगा। आज मुझे मेरा भाई मिल गया।"
लाडो उस लड़के सनी से लिपटकर रो पड़ी। "मेरी जान बचाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद भैया!
सनी भी भावुक हो गया, "इसमें धन्यवाद कहने की कोई आवश्यकता नहीं मेरी बहन ! भाई का तो कर्तव्य होता है बहनों की रक्षा करना।"
लाडो बोली, "भैया! मेरे साथ घर चलिए, मैं आपको कुछ देना चाहती हूँ।"
"जरूर ,बहन!" सनी मुस्कुराते हुए उसके साथ चल पड़ा।
घर पहुँचकर लाडो ने एक डिब्बा निकाला। उसमें बरसों से सँभालकर रखीं वे सभी राखियाँ थीं, जिन्हें वह अपने अनदेखे भाई के लिए खरीदती थी।
उसने भावुक होकर कहा, "भैया! ये सारी राखियाँ मैं हर साल आपके इन्तजार में खरीदती थी। आज मेरा इन्तजार पूरा हुआ।"
उसने सनी की कलाई पर वे सभी राखियाँ बाँधी। माँ ने भी सनी को बेटे की तरह बहुत ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद दिया और भोजन कराया।
अब लाडो हर साल रक्षा-बन्धन के दिन हर्ष और उल्लास के साथ अपने भाई सनी को राखी बाँधने लगी। दोनों का रिश्ता खून का तो नहीं था लेकिन विश्वास ,स्नेह और अपनत्व का था, जो हर रिश्ते से बढ़कर था।
#संस्कार_सन्देश -
रिश्ते केवल खून के नहीं बल्कि प्रेम, विश्वास, त्याग और सुरक्षा के भाव से बनते हैं। ऐसे रिश्ते ईश्वर का सबसे सुन्दर उपहार हैं।
कहानीकार -
#रुखसार_परवीन ( स०अ०)
उच्च प्रा० वि० गजपतिपुर
तेजवापुर, बहराइच (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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