106/2026, बाल कहानी- 06 जुलाई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 106/2026
*06 जुलाई 2026 (सोमवार)*
#बाल_कहानी- #आम_का_लालच
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रामसिंह नाम का किसान मानिकपुर गाँव में रहता था। रामसिंह गाँव में खेती करते थे। रामसिंह के दो बेटे थे- शिव और भोले। शिव बहुत ही चतुर बालक था जबकि भोले अपने नाम के अनुरूप सीधा-साधा था। 
एक दिन रामसिंह अपने दोनों बेटों के साथ खेत पर जा रहे था। रास्ते में अचानक बहुत तेज आँधी चलने लगी और मौसम खराब हो गया। रामसिंह ने कहा, "बच्चो! हमें सही स्थान देखकर कहीं रुक जाना चाहिए। बहुत तेज आँधी चल रही है।" भोले ने कहा पिताजी, "चलिए, पास में ही आम का बाग है, हम वहाँ पर रुक जाते हैं।"
शिव ने कहा, "पिताजी! ऐसा करते हैं, आगे एक ट्यूबवेल वाला कमरा बना हुआ है, हम वहाँ पर चलते हैं। वहाँ रुकने में ज्यादा सही रहेगा।" 
रामसिंह ने कहा, "बेटा! शिव तुम सही कह रहे हो। बाग की अपेक्षा कमरा ज्यादा सुरक्षित रहेगा। चलो...जल्दी-चलते हैं।" ऐसा कहकर दोनों लोग उस कक्ष में चले गये, जहाँ पर ट्यूबवेल लगा हुआ था। 
आँधी थमने के बाद में जब रामसिंह अपने बेटे के साथ बाहर निकले तो देखा बाग में कई पेड़ आँधी की वजह से उखड़ कर गिर गए थे। रामसिंह ने अपने बेटों से कहा, "देखा बेटा! हमें सदा इन पेड़ों के नीचे रुकने से बचना चाहिए बल्कि किसी सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। यदि हम बाग में होते तो हमारे ऊपर भी पेड़ गिर सकता था। भोले ने कहा, "पिताजी! मैं तो इसलिए कह रहा था कि अगर उस बाग में रुकेंगे तो आँधी में जो आम गिरेंगे, वह हम उठा कर ले चलेंगे।"
रामसिंह और शिव हँसने लगे और बोले, "अरे बेटा! हम तो आम अभी भी रास्ते में उठा सकते हैं। इस आँधी में कोई नहीं आया है।" आगे लगे हुए पेड़ों के नीचे कुछ आम पड़े हुए थे। भोले ने तुरन्त आराम उठा लिए और कहा, "अब मैं घर ले जाकर उनकी चटनी बनाऊँगा।" यह सुनकर शिव और पिताजी हँसने लगे।
रामसिंह ने कहा, "ठीक है बेटा! और अपने रास्ते पर आगे बढ़ गए।

#संस्कार_सन्देश -
विपत्ति आने पर सदैव इन बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए।

कहानीकार-
#शालिनी (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय- कूँड 
विकासखण्ड- करहल
जनपद- मैनपुरी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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