113/2026, बाल कहानी- 14 जुलाई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 113/2026
*14 जुलाई 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #लोमड़ी_और_खरगोश
----------------------
एक जंगल में एक लोमड़ी रहती थी। वह बहुत चतुर और चालाक थी। वह जंगल में रोज इधर-उधर घूमती और हमेशा शिकार की तलाश में रहती। अपने से छोटे जानवरों को वह मारकर खाती और अपने परिवार का भरण-पोषण करती थी। वह कभी पहाड़ पर चढ़ती, कभी झरनों की शोभा देखती तो कभी तालाबों में खिले हुए कमल के फूलों को। प्रकृति की सुन्दरता को देखकर उसका मन बहुत प्रसन्न होता।
एक दिन वह पहाड़ पर चढ़ी हुई नीचे चारों ओर प्राकृतिक छटा को देख रही थी। तभी उसे किसी पशु के चीखने की आवाज सुनाई दी। वह तुरन्त नीचे उतरी और पास में पहुँची। उसने देखा कि एक छोटा सा खरगोश झाड़ी में फँसा हुआ था। लोमड़ी के मन में दया जागी। उसने सोचा कि खरगोश को कैसे बचाया जाये? अगर वह सीधे झाड़ी तक जायेगी तो वह भी फँस जायेगी, फिर कोई जंगली जानवर हम दोनों को खा जायेगा। उसने इधर-उधर देखा और एक पेड़ की डाल से एक पतला किन्तु मजबूत डण्डा तोड़ा। लोमड़ी ने उस डण्डे से खरगोश के आस-पास की झाड़ी के एक तरफ किया। फिर झाड़ी को हटाती हुई वह खरगोश तक पहुँची। खरगोश लोमड़ी को देखकर डर गया। किन्तु लोमड़ी ने उसे आराम से बाहर निकालकर उसके सिर पर हाथ फेरा। अब खरगोश का डर छूट गया। वह खुशी से छलाँग मारकर जंगल में चला गया। लोमड़ी खरगोश की जान बच जाने से बहुत खुश हुई।
एक बार लोमड़ी अपने बच्चों सहित तालाब में नहा रही थी। बच्चे पानी में उछल-कूद कर रहे थे। तभी उसके बच्चे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। लोमड़ी ने बहुत प्रयास किया किन्तु गहराई के कारण बच्चों तक न पहुँच सकी। उसने चिल्लाकर मदद माँगी। लोमड़ी की आवाज उसी खरगोश के कानों में पड़ी। खरगोश ने पास आकर देखा कि यह तो वही लोमड़ी है, जिसने उसकी जान बचायी थी। खरगोश ने तुरन्त पानी में कूदकर लोमड़ी के दोनों बच्चों को किनारे तक पहुँचाकर उनकी जान बचा दी। लोमड़ी तैरना नहीं जानती थी। उसने खरगोश को 'धन्यवाद' दिया। उस दिन से खरगोश और लोमड़ी एक सच्चे मित्र बन गये।
#संस्कार_सन्देश -
सच्चा मित्र वही है जो अपनी जान की परवाह न करके अपने मित्र को विपत्ति से बचाये।
कहानीकार -
जुगल किशोर त्रिपाठी (शि०मि०)
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
Comments
Post a Comment