126/2026, बाल कहानी- 29 जुलाई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 126/2026
*29 जुलाई 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #जड़ों_की_ओर
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"इस बार मई में तापमान का पारा बयालीस पार कर रहा है। पता नहीं, जून में क्या रंग दिखायेगा?" रसोई से आकर वेद की मम्मी ने उसके पापा से कहा तो वहाँ खेल रहा वेद तपाक से बोल पड़ा , "तो ए०सी० क्यों नहीं चला लेती मम्मी।"
"अभी?" पापा -मम्मी दोनों एक साथ बोल उठे ।" "वेद...अभी सिर्फ दस बजे हैं, इतनी जल्दी ए.सी. चालू कर देंगे तो फिर बन्द करने का मन ही नहीं करेगा। उधर पाँच बजे तक ए०सी० चलता है बेटा!" मम्मी ने कहा।
"वैसे भी दिन भर ए०सी० में रहना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए सही नहीं है।" पापा ने नाश्ता करते हुए कहा।
"सब हमारी ही गलती है रवि! हमने अपनी आदतें इतनी खराब जो कर ली हैं। पहले तो गाँवों में बिजली दिन-भर रहती नहीं थी, फिर भी गर्मी सहन कर लेते थे, बिना पंखे के भी रह जाते थे, अब पंखे के बिना एक सेकंड नहीं रह सकते।"
"तब शायद गर्मी भी इतनी नहीं पड़ती थी। रमा ‌और फिर गाँवों में चारों तरफ हरियाली होती थी। पेड़ों की घनी छाया, ठण्डी-ठण्डी हवा, तन-मन दोनों को स्फूर्ति से भर देती थी। रात को छत पर पानी डालकर वहीं बिस्तर लगाते थे। कितनी गहरी नींद आती थी। सुबह धूप आने तक सोते रहते थे।" वेद के पापा तो अपने बचपन में खो गये थे।
वेद भी नाश्ता करते हुए दोनों की बातें सुन रहा था। उसने कहा, " पापा! बहुत साल हो गये हमें गाँव गए। दादा-दादी ही अक्सर यहाँ आते हैं। हम नहीं जा पाते। अभी मेरी कोई कक्षाएँ भी नहीं लग रहीं, सिर्फ आपको छुट्टी लेनी पड़ेगी। चलिए, गाँव चलते हैं न पापा! दादा-दादी कितने खुश हो जायेंगे।"
आश्चर्य से पापा ने मम्मी की तरफ देखा। इसके पहले जब भी गाँव जाने की बात चलती, वेद के बहाने शुरू हो जाते। वहाँ नेट काम नहीं करता, कोई दोस्त नहीं है, इतना सारा होमवर्क मिला है और न जाने क्या-क्या..?" उसकी इच्छा देख आने वाले शनिवार को गाँव जाने का प्रोग्राम बन गया। वेद ने कार में अपनी गेंद, क्रिकेट किट , बैडमिंटन, न जाने कितने खिलौने भर कर रख लिए थे। वे सुबह-सुबह ही घर से निकल गये। देर से उठने वाला वेद खिड़की से झाँककर ताजी हवा का आनन्द ले रहा था।" अहा! कितनी सुहानी भोर है! "उसने कहा तो मम्मी मुस्कुरा दी।
उस दिन थोड़ी बदली थी तो गर्मी भी कम थी। गाँव की सड़क पक्की बन गई थी, वहाँ का कायापलट हो गया था। पंचायत, अस्पताल, स्कूल सभी की पक्की इमारतें बदलाव की कहानी कह रहीं थीं। 
बच्चों को देखकर देव के दादा-दादी बहुत खुश हुए। उन्होंने खाना बनवाकर रखा था। देव तो खाने के पहले ही पापा से गाँव घुमाने की जिद करने लगा। पापा के किस्सों में सुनी जगहें तालाब, नहर, अमराई, वह सब कुछ जल्दी देखना चाहता था। दादाजी बोले, " चलो, मैं तुम्हें घुमा लाता हूँ, बाद में बहुत धूप हो जायेगी।" देव ने थोड़ी दूर चलने पर वहाँ का तालाब देखा। तालाब में पानी लबालब भरा हुआ था। उसमें कमल के फूल खिले हुए थे। "यह तो किसी पेंटिंग की तरह सुन्दर है।" उसने कहा। वहाँ कुछ बच्चे और बड़े नहा रहे थे, कुछ औरतें कपड़े धो रही थीं और कुछ पानी भरकर ले जा रहीं थीं। 
"दादाजी गर्मी में पानी कम हो जाता है, इसमें इतना पानी कैसे भरा हुआ है?"
"बेटा! आगे चलो, तुम्हें दिखाता हूँ। यहाँ पास ही नहर बनी है। नदी का पानी नहर के द्वारा तालाब में भरा जाता है ताकि लोगों को आवश्यक कार्यों के लिए पानी मिल सके।"
जब वेद और उसके दादाजी नहर के पास पहुँचे तो वहीं नहर के पास कुछ बच्चे और एक महिला आम तोड़ रहे थे । वेद ने हमेशा ठेले और बाजार में ही आम देखे थे। पेड़ से तोड़ते आम पहली बार देखा तो बहुत खुश हुआ। एक दो बच्चे नहर में नहा भी रहे थे। वेद का मन हुआ कि वह भी नहर में कूद पड़े और कच्चे आम उठा कर खाए। वहाँ खड़े बच्चों ने वेद को कुछ आम दिए। वेद के मुँह में पानी आ गया। उसने कहा, "वाह दादाजी! मैं घर जाते ही इन्हें खाऊँगा।" 
"अच्छा, अब घर चलें । शाम को हम कहीं और घूमने जायेंगे।" दादाजी ने कहा। वेद उछलते-कूदते घर की ओर जाने लगा। उसका उत्साह देखकर दादाजी प्रसन्न थे। शाम को दादाजी और पापा के साथ वेद अमराई घूमने गया। आम के ढेर सारे वृक्षों की घनी छाया बड़ी सुहानी लग रही थी। पापा ने बताया कि, "वे बचपन में अपने दोस्तों के साथ वहाँ आम तोड़ने आते थे।" वहाँ के माली काका ने वेद को ढ़ेर सारे पके आम दिये। इतने मीठे आम! उन्हें खाकर वेद को मजा आ गया। वेद को न अपने खिलौनों की याद आई थी न मोबाइल की। यहाँ अब उनकी जरूरत भी नहीं पड़ने वाली थी। वेद रास्ते भर पेड़, चिड़िया, जन्तु-जीवों के बारे में पूछकर अपनी जिज्ञासा शान्त करता रहा। अमराई से वे अपने घर की ओर लौट रहे थे और वेद अपनी जड़ों की ओर...।

#संस्कार_सन्देश -
हमें अपने गाँव, वहाँ के रहन-सहन और पेड़-पौधों को कभी नहीं भूलना चाहिए। इनसे हम बचपन से ही जुड़े रहे।

कहानीकार-
डॉ० #दीक्षा_चौबे (व्याख्याता)
शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, उमरपोटी दुर्ग, छत्तीसगढ़

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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