125/2026, बाल कहानी- 28 जुलाई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 125/2026
*28 जुलाई 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #धरा_के_प्राण
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पर्यावरण की सामूहिक कक्षा में अध्यापिका द्वारा एक ऐसी अवधारणा से बच्चों को परिचित कराया गया, जो राजू के पल्ले बिल्कुल नहीं पड़ी। घर लौटते हुए उछलते-कूदते राजू के स्थान पर गम्भीर राजू को देखकर मुनिया चिन्तित हो उठी, "क्या हुआ राजू स्कूल में? किसी ने कुछ कहा क्या?"
"नहीं मुनिया! अच्छा, यह बता, पर्यावरण की क्लास तुझे समझ आई क्या?"
"हाँ! समझ भी आयी और मैं उसके बारे में आज नानी से बात भी करूँगी।"
"पर मुझे तो बिल्कुल नहीं समझ आई।" राजू ने रुआँसे स्वर में कहा।
तब तक घर आ गया। बच्चे नानी (राजू की दादी ) से लिपट गए। उस समय मुनिया और राजू ने चुपचाप भोजन किया। विश्राम करने के पश्चात दोनों अपना-अपना गृह कार्य करने लगे। राजू फिर अटका क्योंकि गृह-कार्य में मियाँ बाकी अवधारणा पर अपने शब्दों में एक निबन्ध लिखना था या फिर वास्तविक धरातल पर उक्त अवधारणा का अनुप्रयोग करना था। मुनिया दूसरे विकल्प के लिए अधिक उत्सुक थी। पर्यावरण के गृह कार्य के लिए दो दिन का समय दिया गया था।
रात हुई और दोनों हमेशा की तरह दादी के पास आ धमके। राजू की अपनी समस्या थी कि किसी तरह अपने शब्दों में निबन्ध लिखकर गृह-कार्य से छुट्टी पाये। मुनिया उस कार्य का प्रयोग करने पर तुली हुई थी और दादी!... दादी तो जैसे हर समस्या का समाधान थी। दादी और मुनिया ने पहले राजू की समस्या पर ध्यान दिया। दादी ध्यानपूर्वक मियाँ बाकी के बारे में बताने लगी। अकीरा मियाँ बाकी वनस्पति विज्ञानी थे। जिनका जन्म जापान के ओकायामा प्रान्त में हुआ था। पौधों के सन्दर्भ में घूमते-घूमते एक बात उनकी समझ में आई कि स्थानीय पौधे आपस में मिलकर सबसे मजबूत जंगल विकसित करते हैं तो पहली बात स्थानीय पेड़ पौधों का उपयोग...।"
"आगे दादी!" अब राजू समझ के साथ बोल रहा था। "पेड़-पौधों का सघन रोपण, मतलब ?"
दादी, "अरे बच्चों! कम जगह में घुसा-घुसाकर पौधों को लगाना यानी प्रति वर्ग मीटर में दो से चार पौधे। यह हुई दूसरी बात। पौधों में इस कारण से प्रतियोगिता शुरू हो जाएगी सूरज की गर्मी, पानी की और वे तेजी से बढ़ेंगे। यह हुई तीसरी बात।"
"और इसका फायदा?
"अरे मुनिया! फायदा ही फायदा। जो जंगल सामान्य रूप से बनने में सौ साल लेते हैं, वह मात्र तीन साल में ही आत्मनिर्भर और घने हो जाएँगे। शुरुआती तीन साल ही उन्हें देखभाल की जरूरत भी होगी और हाँ! अपने माननीय मुख्यमन्त्री जी द्वारा प्रयागराज में छप्पन वर्ग मीटर में मियाँ बाकी पद्धति का सफल प्रयोग किया गया।" राजू ताली बजाता हुआ बोला, "अब तो मैं सबसे अच्छा निबन्ध लिखूँगा और मैं खाली जमीन में मियाँ बाकी पद्धति का प्रयोग करूँगी। अपने साथियों पड़ोसियों अध्यापकों और अपनी प्यारी नानी के साथ। रात बहुत हो चुकी है। बच्चों! चलो, अब सोते हैं।"
सभी "जी, अच्छा दादी!" कहकर सोने चले गये।
संस्कार सन्देश -
पेड़ लगाओ, धरा बचाओ।
कहानीकार-
डॉ० #सीमा_द्विवेदी (स०अ)
कम्पोजिट विद्यालय कमरौली जगदीशपुर (अमेठी)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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