112/2026, बाल कहानी- 13 जुलाई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 112/2026
*13 जुलाई 2026 (सोमवार)*
#बाल_कहानी - #नारी_घर_की_नींव
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पूर्णियां के एक छोटे से घर में गीता नाम की महिला रहती थी। सुबह चार बजे उठती। पहले घर का काम, फिर बच्चों को तैयार करके स्कूल भेजती और फिर खुद सिलाई का काम करने बैठ जाती। पति फैक्ट्री में मजदूर था। आधी तनख्वाह शराब में चली जाती और आधी से खर्च मुश्किल से चलता था।
पड़ोस की औरतें कहतीं, "गीता, छोड़ दे उसे। दूसरी शादी कर ले।" गीता बस मुस्कुरा देती।
एक दिन गीता की बेटी बुखार से तड़प रही थी। रात के बारह बज गए लेकिन पति अभी तक घर नहीं आया था। गीता को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे? अन्त में गीता ने अपनी अन्तिम चूड़ियाँ बेचीं और उसी पैसे से दवाई और डॉक्टर का इन्तजाम किया। पूरी रात बेटी का माथा सहलाती रही।
सुबह पति आये। सारी बात जानकर गुस्सा हो गया। उसने चिल्लाते हुए कहा, "चूड़ियाँ कहाँ गईं?"  
गीता बोली, "बेटी की जान बच गई। चूड़ियाँ फिर बन जाएँगी।"
दस साल बीत गए। गीता ने सिलाई करके बेटी को डॉक्टर बनाया। बेटा इंजीनियर बना। आज वही पति बीमार हैं। बिस्तर पर हैं। बेटी घर आकर माँ के पैर छूती है और कहती है, "माँ, तुमने हार नहीं मानी। अगर उस दिन तुम टूट जातीं, तो आज हम कुछ नहीं होते।"
गाँव में अब पंचायत होती है तो सबसे पहले गीता को बुलाया जाता है। लोग कहते हैं, "नारी घर बनाती भी है और जरूरत पड़े तो घर को सँभालती भी है।"

#संस्कार_सन्देश -
नारी सम्मान माँगती नहीं, सम्मान कमाती है।

कहानीकार-
डॉ० #स्वराक्षी_स्वरा: 
मध्य विद्यालय हाजीपुर आवासबोर्ड खगड़िया  
प्रखंड, जिला खगड़िया

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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