107/2026, बाल कहानी- 07 जुलाई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 107/2026
*07 जुलाई 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी- #मम्मी_तुम_भी....
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"मम्मी तुम भी यार...! हर समय मुझे टोकते रहती हो। अरुण को देखो, वह कभी ऐसी शिकायत नहीं करता।" बार- बार माँ की शंकित नजरों में रहने वाले सतीश ने झल्लाते हुए आज अपनी माँ को कह ही दिया। "बेटा! अरुण का व्यवहार ही कुछ ऐसा है कि उसके माता- पिता को उसकी कोई चिन्ता नहीं।"  
"अरे यार मम्मी! इसमें व्यवहार की क्या बात है?"  
"होती है बेटा! व्यवहार से ही व्यक्ति के बारे में लोगों की राय बनती है और समाज में उसे वैसा सम्मान भी मिलता है।" 
       अरुण के माता-पिता नगर के एक निजी स्कूल में शिक्षक थे। बचपन से ही उनके शालीन व्यवहार का असर स्वत: ही उनकी सन्तान पर पड़ता गया। अरुण माता-पिता की तरह बोलने व अभिव्यक्ति से पहले सोच-समझकर शालीन शब्दों का प्रयोग करता रहता व सभी का प्रिय बनता। अपनी मित्रमण्डली में भी औपचारिक-अनौपचारिक बातचीत करते हुए वह शब्दों की मर्यादा का सदा ध्यान रखता। वहीं बचपन से अच्छी आर्थिक स्थिति वाले परिवार में जन्मा सतीश अशिष्ट शब्दों का प्रयोग करने से नहीं चूकता। अनेक अशिष्ट व असभ्य बाजारू शब्दों का प्रयोग करने में उसे कोई हिचक नहीं होती। तरह-तरह के लोगों से मिल वह बतियाता रहता और शब्दों की मर्यादा का कम ही ध्यान रखता। 
"अरे यार मम्मी! कहाँ पर गलती करता हूँ मैं? बचाओ ना..।" सतीश बोला। "शुरुआत ही गलत कर रहे हो। भला अपनी माँ को 'यार' कहना अच्छा लग रहा है क्या? माता-पिता व अपने से बड़े लोगों को इस प्रकार के शब्दों से सम्बोधित करना अशिष्टता कहलाती है।" अब सतीश को लग रहा है कि वास्तव में उसे यों ही बिना सोचे-समझे बोलने की आदत उसे गलत व्यवहार की ओर ले जा रही है। उसने माँ से क्षमा माँगी और अब पहली बार उसके मुँह से "मम्मी जी" सुनकर उसकी माँ के दिल को अब, भारी सुकून मिल रहा था।

#संस्कार_सन्देश -
हमें हमेशा अपने से बड़ों के प्रति शिष्टाचार और मर्यादा का पालन करना चाहिए।

कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (प्र०अ०) 
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी,
बेरीनाग

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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