117/2026, बाल कहानी- 18 जुलाई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 117/2026
*18 जुलाई 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी - #माता_पिता_का_सम्मान
------------------

एक छोटे से गाँव में नीरज नाम का एक बालक रहता था। वह पढ़ाई में होशियार, स्वभाव से विनम्र और संस्कारों से परिपूर्ण था। उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह अपने माता-पिता के सम्मान को जीवन का सर्वोच्च धर्म मानता था।
नीरज के पिता एक साधारण किसान थे और उसकी माँ गृहिणी। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे को अच्छे संस्कार दिए। नीरज प्रतिदिन विद्यालय जाने से पहले अपने माता-पिता के चरण स्पर्श करता और उनके आशीर्वाद के बिना घर से बाहर नहीं निकलता था।
एक दिन विद्यालय में कुछ बच्चों ने उसके साधारण कपड़ों का मज़क उड़ाया। उन्होंने कहा, "तुम्हारे माता-पिता तुम्हें अच्छे कपड़े भी नहीं दिला सकते।" नीरज ने शान्त स्वर में उत्तर दिया, "मेरे माता-पिता ने मुझे अच्छे संस्कार, ईमानदारी और मेहनत का पाठ पढ़ाया है। मेरे लिए उनका सम्मान सबसे बड़ा है।"
समय बीतता गया। नीरज ने कठिन परिश्रम और माता-पिता के आशीर्वाद से उच्च शिक्षा प्राप्त की और एक प्रतिष्ठित अधिकारी बन गया। सम्मान समारोह में जब उससे उसकी सफलता का रहस्य पूछा गया, तो उसने सबसे पहले अपने माता-पिता को मंच पर बुलाया। उनके चरण स्पर्श करते हुए उसने कहा, "मेरी हर सफलता मेरे माता-पिता के त्याग, प्रेम और आशीर्वाद का परिणाम है। उनका सम्मान ही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है।"
पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। उस दिन सभी ने अनुभव किया कि, "सच्ची सफलता केवल ऊँचे पद या धन से नहीं मिलती, बल्कि अपने माता-पिता और बड़ों के प्रति प्रेम, सम्मान और सेवा की भावना से प्राप्त होती है।"

#संस्कार_सन्देश -
जो संतान अपने माता-पिता का सम्मान करती है, उसके जीवन में सफलता, सुख और सम्मान स्वयं चलकर आते हैं।

कहानीकार-
#पुष्पा_पाठक (पू०प्रा०)
सेवानिवृत्ति शिक्षक शासकीय माध्यमिक शाला डेरा पहाड़ी छतरपुर (म०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#मिशन_शिक्षण_संवाद

Comments

Total Pageviews