108/2026, बाल कहानी- 08 जुलाई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 108/2026
*08 जुलाई 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #अधिकार
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एक गाँव में संतोष नाम का एक युवक रहता था। उसकी तीन बहनें थी- सबसे बड़ी लीला, उससे छोटी रीमा और सबसे छोटी अनीता। 
लीला के विवाह के कुछ समय बाद ही उनके पिता का निधन हो गया और फिर माँ भी दुनिया से चली गईं। माता-पिता के जाने के बाद लीला और उसके पति ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी सँभाली। उन्होंने संतोष और बहनों की देखभाल की तथा समय आने पर सभी के विवाह भी कराए। 
विवाह के बाद संतोष के स्वभाव में बदलाव आने लगा। वो अपनी बहनों की उपेक्षा करने लगा और पत्नी के कहने पर अधिकतर निर्णय लेने लगा। 
जब भी उसकी बहनें मायके आती तो उन्हें पहले जैसा स्नेह और सम्मान नहीं मिलता। धीरे-धीरे बहनों ने मायके आना कम कर दिया।
कुछ वर्षों पश्चात माता-पिता की सम्पत्ति के बँटवारे का समय आया। संतोष ने पूरी सम्पत्ति अपने पास रखने की कोशिश की और अपनी बहनों को उनका हिस्सा देने से इनकार कर दिया।
 तीनों बहनों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। वे दुःखी थीं, परन्तु संतोष का हृदय नहीं पिघला। बहनों ने बहुत समझाने का प्रयास किया लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला, तब उन्होंने अपने अधिकार के लिए कानूनी मार्ग अपनाने का निर्णय लिया।
तीनों बहनों ने मिलकर न्यायालय में मुकदमा दायर किया। कुछ समय तक सुनवाई चलने के बाद न्यायपालिका ने न्याय करते हुए आदेश दिया कि माता-पिता की सम्पत्ति में बेटियों का भी बेटों के समान अधिकार है। कानून की दृष्टि में बेटा-बेटी दोनों समान हैं। न्यायालय के आदेश पर संतोष को माता-पिता की सम्पत्ति का बराबर बँटवारा करना पड़ा और बहनों को उनका अधिकार मिल गया।
तब संतोष को एहसास हुआ कि सम्पत्ति के लालच में उसने अपने सबसे अनमोल रिश्तों को ठेस पहुँचाई। वह तो बहनों से माफी माँगने लायक भी नहीं रह गया था।

#संस्कार_सन्देश -
माता-पिता की सम्पत्ति में बेटियों का भी बेटों के समान अधिकार होता है। साथ ही हमें उन रिश्तों का सम्मान करना चाहिए, जिन्होंने कठिन समय में हमारा साथ दिया।

कहानीकार-
#रुखसार_परवीन (स०अ०)
उच्च प्राथमिक विद्यालय गजपतिपुर
बहराइच, उत्तर प्रदेश

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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