111/2026, बाल कहानी- 11 जुलाई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 111/2026
*11 जुलाई 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी- #परिस्थिति
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अर्जुन नाम का बालक गाँव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पाँच का छात्र था। अर्जुन को विद्यालय पहुँचने में प्रतिदिन देरी हो जाती थी। आज भी अर्जुन विद्यालय में देर से आया। जब अर्जुन कक्षा में पहुँचा तो अध्यापक कक्षा में पढ़ा रहे थे। अध्यापक ने अर्जुन से पूछा, "आज भी इतनी देर से आए हो, आज मैं तुम्हें नहीं छोडूँगा। चलो, हाथ आगे बढ़ाओ!" ऐसा कहकर उन्होंने एक छड़ी अर्जुन की हथेली में मार दी। और बोले, "चलो, जाओ जाकर बैठो।"
तभी पास ही बैठे मोहित ने अर्जुन से कहा, "तुम गुरुजी को बता क्यों नहीं देते हो कि तुम रोज क्यों देर से आते हो।" अर्जुन ने कहा, "नहीं..नहीं मोहित! गुरुजी को मत बताना। गुरुजी बहुत हँसेंगे।"
एक दिन गुरूजी को विद्यालय जाते समय एक बच्चा रास्ते में साइकिल पर सब्जी बेचते हुए दिखा। गुरुजी बच्चे के बगल से निकले तो देखा कि यह बालक तो अर्जुन था जो विद्यालय देर से आता था।
वह चुपचाप आगे बढ़ गये और विद्यालय पहुँच गये। कक्षा में पहुँचकर गुरुजी आत्म ग्लानि से भर गए। उन्हें समझ में आया कि विद्यालय से पहले भी घर-परिवार आता है।
जब अर्जुन विद्यालय पहुँचा तो गुरु जी ने पूँछा, "अर्जुन!तुमने बताया क्यों नहीं कि तुम इतनी मेहनत का काम करते हो? इसलिए स्कूल आने में देरी हो जाती है।"
अर्जुन ने उत्तर दिया, "गुरुजी! घर में खर्चा बहुत है और पैसे की बहुत ज्यादा जरूरत है। गुरुजी पढ़ाई करने से घर का खर्च थोड़ी चल जाएगा।"
गुरुजी ने उत्तर दिया, "बेटा! मैं समझता हूँ। मैं नहीं जानता था कि तुम्हारे ऊपर परिवार की जिम्मेदारी है। तुम स्कूल आओ और पढ़ो। जो भी कार्य रह जाएगा। मैं बाद में पूरा करवाऊँगा।"
अर्जुन जाकर अपने स्थान पर बैठ गया। गुरुजी कार्य देने के बाद गहरी सोच में डूब गए और जिन्दगी से सवाल-जवाब करने लगे, जिनके प्रश्न-उत्तर ढूँढना बहुत कठिन था।
#संस्कार_सन्देश -
गलतियों के पीछे कोई न कोई राज छुपा होता है। बिना जाने हमें कोई धारणा नहीं बनानी चाहिए।
कहानीकार-
#शालिनी (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय- कूँड़
विकास क्षेत्र-करहल।
जनपद- मैनपुरी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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