स्वागत नए वर्ष का
विक्रमी नवीन साल स्वागतम सुमंगलम।
आइये विराजिये सुस्वागतम सुमंगलम।।
वृक्ष बेल डाल शाख हो गयीं हरी- हरी।
भिन्न- भिन्न पुष्प की सुगंध से दिशा भरी।।
सूर्य अस्त रात्रि काल फूल श्वेत खिल गये।
कीटकर्ष वर्तिका पराग पीत भर गये।।
अल्पना सजी- धजी प्रसन्न प्रज्ञ मंगलम।
विक्रमी नवीन साल स्वागतम सुमंगलम।।
भिन्न दाल तेल जिंस अन्न धान्य आ गये।
ग्राम धाम को दिवा सुकाल के सुहा गये।।
धूप दीप अर्चना जलाभिषेक चन्दना।
शक्ति भक्ति व्याप्त गूँज गेय गीत वंदना।।
सुभाषितम शुभागमन स्वागतम सुमंगलम।
विक्रमी नवीन साल स्वागतम सुमंगलम।।
आत्मग्लानि द्वेष त्याग योग क्षेम साधना।
स्वार्थ हीन नीति न्याय ज्ञान की अराधना।।
शान्ति शील प्रेम प्रीति नीति वाक भाष हो।
देश का विकास हो सुकीर्ति का निवेश हो।।
भोर का प्रकाश दौर द्वार द्वार मंगलम।
विक्रमी नवीन साल स्वागतम सुमंगलम।।
आत्मबोध विश्वबोध से एकात्म बोध हो।
दृश्य के प्रतीक से अदृश्य का प्रबोध हो।।
मानवीय भाव वृत्ति संस्कार ज्ञान हो।
भिन्नता में एक की अभिन्नता का भान हो।।
धर्म धैर्य धारना विचारना सुमंगलम।
विक्रमी नवीन साल स्वागतम सुमंगलम।।
रचयिता
हरीराम गुप्त "निरपेक्ष"
सेवानिवृत्त शिक्षक,
जनपद-हमीरपुर।

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