38/2026, बाल कहानी- 07 मार्च
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 38/2026
*07 मार्च 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी - #मोर_और_मोहन
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एक मोर था उसके एक छोटा सा बच्चा था। वह दोनों एक बाग में रहते थे और पेड़ों पर उछल-कूद कर प्रसन्न रहते थे। बाग के पास में ही एक बहुत बड़ा मकान था। उसमें एक महिला रहती थी। वह महिला बहुत खूबसूरत थी, पर बहुत ही घमण्डी भी थी।
वह जीवों पर दया नहीं करती थी। जो भी कोई उसका जरा-सा भी नुकसान कर देता था तो वह उसको सजा जरूर देती थी। वह जब अपने दालान में गेहूँ सुखाती या कोई दाल सुखाती तो वह मोर का बच्चा और मोर दीवार पर आकर बैठ जाते और मोर का बच्चा नटखट होने की वजह से धीरे से नीचे उतर आता और थोड़े-बहुत दाने खा जाता। मोर ऊपर ही बैठा रहता, क्योंकि वह जानता था कि यह महिला जालिम है। हालाँकि वह बच्चे को भी रोकता, पर वह मानता नहीं था।
एक दिन उस महिला ने देखा कि कोई न कोई है जो उसके अनाज को खाकर जा रहा है। उसने अन्दर से चुपचाप झाँककर देखा तो वह छोटा सा मोर का बच्चा था। वह दबे पाँव दौड़ के आयी और उसने मोर के बच्चे को कसकर पकड़ लिया।
मोर के बच्चे को पकड़ लिया तो मोर जोर से चिल्लाने लगा और अपने बच्चे को बचाने के लिए वह भी नीचे कूदकर आ गया।
उस महिला ने मोर और बच्चे दोनों को एक जाल में कैद कर लिया और वह इतना गुस्से में आ गई। उन्हें पकड़कर एक पेड़ पर जाकर के बाँध दिया और नीचे आग सुलगा दी।
अब आग लगने से मोर और उसका बच्चा झुलसने लगे।
मोर भगवान श्री कृष्ण का भक्त था वह हमेशा जब 'पाओ पाओ' की आवाज करता था तो अन्दर से वह 'मोहन...मोहन 'बोलता था।
अब जब वह मुसीबत में पड़ा और उसको लगा कि वह और उसका बच्चा जलकर मर जाएँगे तो उसने फिर से 'पाओ..पाओ' करके चिल्लाना शुरू किया, इसका मतलब था कि- भगवान हमें बचा लो।
तभी एक गाय दौड़ती हुई वहाँ पर आई और उसने देखा कि किसी ने मोर और उसके बच्चे को फँसाकर नीचे आग लगा दी है। वह जल्दी से दौड़ के मन्दिर में गई और वहाँ पर जाकर दो मिनट के लिए खड़ी हो गई।
वह लौटकर आयी और अपने पैरों से उसने सभी लकड़ियाँ इधर उधर कर दीं, जिससे आग बुझ गई।
अब उसने अपने खुर और सींगों की मदद से जाल को भी काट दिया, जिससे मोर और उसका बच्चा दोनों आजाद होकर उससे बाहर आ गये।
मोर ने गाय के चारों तरफ घूम-घूमकर उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। गाय ने भी उसे जीभ से चाटकर दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया। अब वह तीनों जंगल में प्रेम से साथ-साथ रहते थे। किसी ने ठीक ही कहा है कि भगवान अपने भक्तों की किसी न किसी रूप में मदद अवश्य करते हैं।
संस्कार सन्देश -
भगवान भक्त की रक्षा करते हैं। हमें माता-पिता की बात माननी चाहिए।
कहानीकार -
#पूनम_सारस्वत 'प्रज्ञा' (स०अ) एकीकृत विद्यालय रुपानगला खैर, अलीगढ़ (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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