50/2026, बाल कहानी- 23 मार्च

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 50/2026
*23 मार्च 2026 (सोमवार)*
#बाल_कहानी - #जंगल_का_सबसे_बड़ा_नियम
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घने जंगल में हर सुबह एक अजीब दृश्य होता था। एक तरफ तोते और मैना मिलकर पेड़ों पर बैठकर मधुर गीत गाते। वे कहते, “हम प्रकृति की पूजा करते हैं।”
दूसरी ओर, कुछ बन्दर और लोमड़ियाँ नदी के किनारे जाकर बड़े नियम से पानी पीते और सिर झुकाकर कहते, “हम अपने तरीके से इबादत करते हैं।”
जंगल में हर कोई अपने-अपने तरीके से पूजा कर रहा था, लेकिन उसी जंगल के बीचों-बीच एक छोटा-सा पौधा था, जो हर दिन कुचला जाता था। कभी बन्दर खेलते-खेलते उसे रौंद देते तो कभी लोमड़ियाँ उसे नजरअन्दाज कर आगे बढ़ जातीं।
एक दिन उस पौधे के पास बैठी एक नन्ही चींटी ने पूछा, “तुम इतने चुप क्यों रहते हो?”
पौधा मुस्कुराया, “मैं सोचता हूँ… ये सब जो ऊपर आसमान की ओर देखकर प्रार्थना करते हैं, क्या उन्हें नीचे झुककर किसी को बचाना नहीं चाहिए?”
चींटी कुछ देर सोचती रही। अगले दिन उसने देखा, तोते फिर गा रहे थे, बन्दर फिर नियम निभा रहे थे… और वही पौधा फिर कुचला जा रहा था।
इस बार चींटी ने ऊँची आवाज़ में कहा, “तुम सब ऊपर देखकर भगवान को ढूँढ रहे हो, पर नीचे जो जिन्दगी है, उसे क्यों नहीं देख रहे?” जंगल में सन्नाटा छा गया। तोते चुप हो गए। बन्दर रुक गए। लोमड़ियाँ ठहर गईं।
पहली बार सबने नीचे देखा,
जहाँ एक छोटा-सा पौधा, बिना कुछ कहे, सब कुछ सह रहा था।
उस दिन से जंगल का एक नया नियम बना- “जो सबसे कमजोर को बचायेगा, वही सबसे बड़ी पूजा करेगा।”

#संस्कार_सन्देश - 
सच्ची पूजा और इबादत शब्दों या तरीकों में नहीं, बल्कि कमजोर और जरूरतमन्द की रक्षा करने में है।


कहानीकार- 
#दयावती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय शेखनपुरवा (प्रथम)
ब्लाॅक- चितौरी, जिला- बहराइच (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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