51/2026, बाल कहानी- 24 मार्च
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 51/2026
*24 मार्च 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी- #मजबूरी
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एक जंगल में एक गुफा थी। उस गुफा के अन्दर शेर रहता था। शेर सभी जंगली जानवरों को परेशान करता था। एक दिन जंगल के जानवरों ने सभा की। सभा में विचार-विमर्श किया कि, "शेर से हमेशा डर-डरकर रहना पड़ता है। कोई ऐसी तरकीब निकालो कि शेर हमेशा के लिए यहाँ से चला जाय।"
तभी एक बुद्धिमान खरगोश ने कहा कि, "मेरे पास एक तरकीब है। मैं और मेरा परिवार गुफा के अन्दर जायेंगे और आप सभी लोग छुपकर देखेंगे।" खरगोश की पत्नी ने कहा- "मुझे तो डर लग रहा है। हमारे साथ हमारा बच्चा भी है। शेर हमको खा गया तो..?" खरगोश ने कहा- "तुम धीरज रखो, जैसा मैं कहूँगा, तुम वैसा ही करना।" तभी कबूतर आया और कहने लगा- "शेर आ रहा है।" सभी जानवर डरने लगे, जैसे ही शेर गुफा के बाहर आया, गुफा के अन्दर से जोर की आवाज आयी, "मुझे और मेरे बच्चों को भूख लग रही है। जाओ! शेर का माँस लाओ! मुझे शेर का मांँस अच्छा लगता है।"
"ठीक है, अभी लाता हूँ।" खरगोश को बोलते हुए शेर ने सुन लिया। शेर ने सोचा, "मेरे से भी खतरनाक जानवर गुफा के अन्दर चला गया है। इससे अच्छा वो मुझे खा जाय मैं यहाँ से भाग जाता हूँ।" और शेर वहाँ से भाग गया। सभी जानवर खुशी से नाचने लगे।
कुछ दिन सभी खुशी से रहे। एक दिन अचानक दूसरे जंगल का भेड़ियों का झुण्ड उस जंगल में आ गया। उन्होंने सारे जानवरों को परेशान करना शुरू कर दिया। खरगोश, लोमड़ी, बन्दर सारे जानवर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भटकने लगे। वह भेड़ियों का झुण्ड इतना शक्तिशाली था कि जंगल के किसी भी जानवर की उनके साथ एक न चली। भेड़िए एक-एक करके जानवरों को अपना शिकार बनाने लगे। अब सभी जानवरों को अपने शेर दा की याद आई। उनको याद आया कि शेर बेवजह किसी भी जानवर का शिकार नहीं करता था। वे पछताने लगे।
शेर जो अब दूसरे जंगल में चला गया था, उसे भेड़ियों की करतूत का पता लग गया था। उससे न रहा गया। वह वापस अपने जंगल में आया और भेड़ियों के झुण्ड पर टूट पड़ा। सारे भेड़िए भाग खड़े हुए। शेर की इस दरिया-दिली को देखकर जंगल के सारे पशु-पक्षी शर्मिन्दा हो गए। उन्हें एहसास हो रहा था कि उन्होंने शेर के साथ कितना बुरा व्यवहार किया। वे सभी शेर के सामने आये और माफी मांँगने लगे। शेर बोला कि, "तुम लोग मेरे शिकार करने से डरते हो न! मैं कभी किसी बेकसूर जानवर को नहीं मारता, किन्तु जीवित रहने के लिए मुझे भी भोजन की आवश्यकता होती है। इसलिए मुझे शिकार करना पड़ता है।
मैं भी मजबूर हूंँ।"
ऐसा सुनकर सभी जानवर भावुक हो गए और साथ में शेर भी। सभी ने अपने व्यवहार के लिए शेर से माफी मांँगी और शेर ने भी सभी को सुरक्षा का आश्वासन दिया। अब सभी जानवर मिल-जुलकर रहने लगे।
#संस्कार_सन्देश-
किसी शक्तिशाली व्यक्ति को इतना अधिक भयभीत मत करो कि वह समय पर तुम्हारी रक्षा ही न कर सके।
कहानीकार-
संगीता राणा (बाल वाटिका शिक्षिका)
रा० प्रा० वि० जैली,
ब्लाॅक- जखोली, रुद्रप्रयाग
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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