37/2026, बाल कहानी- 06 मार्च
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 37/2026
*06 मार्च 2026 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी - #धुँधली_आँखें
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सारी तैयारी हो चुकी थी। रात का भोजन करने के बाद मीना अपने कमरे में पढ़ने के लिए गई, पर कुछ ही देर में कमरे की लाइट बन्द हो गई। रजाई के अन्दर मोबाइल की हल्की रोशनी चमक रही थी। वह रोज की तरह गेम खेलने लगी।
माँ ने आवाज लगायी, “मीना! सो जाओ बेटा! सुबह जल्दी उठना है।”
“हाँ, मम्मी! बस पाँच मिनट...।” मीना ने कहा, पर पाँच मिनट कब एक घण्टे में बदल गए। उसे पता ही नहीं चला।
अब यह उसकी आदत बन चुकी थी। खाना जल्दी-जल्दी खाकर गृहकार्य अधूरा छोड़कर वह मोबाइल पर गेम खेलने बैठ जाती। माँ-पिता समझाते, डाँटते भी, पर वह मानती नहीं थी।
कुछ दिनों बाद मीना ने शिकायत की, “माँ! किताब के अक्षर साफ नहीं दिखते… सब धुँधला-धुँधला लगता है।”
पिता ने देखा तो उसकी आँखें लाल थीं और सिर दर्द भी हो रहा था।
अगले दिन वे उसे डॉक्टर के पास ले गये। डॉक्टर ने जाँच कर पूछा, “बेटा! क्या तुम ज्यादा मोबाइल चलाती हो?” मीना चुप रही। माँ ने सारी बात बता दी। डॉक्टर ने समझाया, “अधिक देर तक मोबाइल देखने से आँखें कमजोर हो जाती हैं। याद रखने की क्षमता भी कम होती है। बच्चा खेलना-कूदना छोड़ देता है और पढ़ाई से मन हटने लगता है।” फिर उन्होंने एक छोटा वीडियो दिखाया, जिसमें एक बच्चा चश्मा लगाकर खिड़की से बाहर खेलते बच्चों को देख रहा था, पर स्वयं खेल नहीं पा रहा था।
मीना की आँखें भर आयीं। उसने धीरे से पूछा, “क्या मेरे साथ भी ऐसा हो सकता है?” यह सुनकर डॉक्टर बोले, “अगर समय रहते आदत नहीं बदली तो हो सकता है... लेकिन अभी देर नहीं हुई है।”
घर आकर मीना ने अपना मोबाइल अलमारी में रख दिया। शाम को उसने गृहकार्य पूरा किया और फिर बाहर खेलने चली गयी। माँ-पिता उसे देखकर मुस्करा दिए। उस दिन मीना को किताब भी साफ दिख रही थी और आसमान भी।
संस्कार सन्देश -
मोबाइल का सीमित उपयोग ही लाभदायक है। अधिक मोबाइल प्रयोग से आँखें, स्मरण शक्ति
और पढ़ाई, इन तीनों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। खेल-कूद और पढ़ाई ही बच्चों के वास्तविक विकास का आधार है।
कहानीकार -
दयावती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय शेखनपुरवा प्रथम
ब्लॉक- चित्तौरा, जनपद बहराइच
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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