46/2026, बाल कहानी- 17 मार्च
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 46/2026
*17 मार्च 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #धुँधलाते_रिश्ते
----------------------
होली में बच्चों को लेकर पतिदेव गये थे। पोतियों के आने की प्रतीक्षा में अधीर प्रभा बार-बार कुछ न कुछ तैयारी करती। सोच रही थी कि कुछ तो ऐसा झटपट बना सकती, जो पोतियों को खाकर आनन्द आता।
अपने ऑपरेशन वाली जगह के दर्द को समेटते घड़ी देख, ठीक समय पर सूजी भुनकर लाल किया। साथ ही बादाम, किसमिस, इलायची रखकर पुनः घड़ी देख द्वार पर निकल गयी।
आने की आहट गाड़ी की हॉर्न बजते ही मिल गई, लेकिन गाड़ी किसी और की रुकी, फिर बेचैनी बढ़ी, तभी रसोई की खिड़की से देखा, बहू प्रवेश कर रही है।
उसने झट गर्म पानी डाल सूजी को चला पुनः पानी डाल जल्दी ही शक्कर डाल धीमे आँच में छोड़ निकलकर द्वार पर खड़ी हो गई।
बहू को गले लगा लिया। पूछने पर पता चला कि, "गाड़ी थोड़ा पीछे खड़ी है क्योंकि हमारे द्वार पर कोई गाड़ी खड़ी है मम्मी जी इसलिए हम लोग पीछे से आ रहे हैं।"
"ओह!" कहती प्रभा पोतियों को देखने नजरें घुमाते मुड़ी, तभी दोनों आकर लिपट गई।
जब तक पतिदेव बहू और दोनों पोती हाथ मुँह धोकर बैठे। प्रभा जी सबसे पहले गर्म हलुवा लेकर बोलीं, "सरप्राइज सोनी, मोनी आँखें बन्द करो।"
सोनी मोनी ने बन्द आँखें खोली,
"वाह! सूजी का हलुवा दादी!
हमारी पसन्द का।" बहू भी मुस्कुराती हुई बोली, "मम्मी जी! आपको बच्चों की पसन्द का इतना ध्यान था?" हलुवा खाते सभी चहक उठे । प्रभा जी की आँखें खुशी से नम हो गईं।
बहू ने कहा, "क्यों तकलीफ़ उठाती हो मम्मी! आपके हाथ में दर्द रहता है।"
"मानती नहीं हो आप कहना, अपना ध्यान रखा कीजिए।"
कहकर दोनों पोती लिपटकर गालों को चूमने लगीं। खुशी और आनन्द की होली सबके आते ही रंगीन हो गयी। वर्तमान के आडम्बर में धुँधलाते रिश्ते चमक उठे।
#संस्कार_सन्देश -
पारिवारिक सदस्यों की रुचि का ध्यान रखना, उनकी पसन्द की चीजें बनाकर देना, इससे रिश्ते बेहद दृढ़ और मजबूत होते हैं।
कहानीकार-
#अमितारावी_दुबे
(पू० प्रा०)
शासकीय महाविद्यालय जनपद छिपली
तहसील नगरी ग्राम खम्हरिया
छत्तीसगढ़
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
Comments
Post a Comment