54/2026, बाल कहानी- 30 मार्च

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 54/2026
*30 मार्च 2026 (सोमवार)*
#बाल_कहानी - #प्रदूषण_का_मकड़_जाल
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 हमेशा की तरह राजू और मुनिया स्कूल से लौटकर अपना गृह कार्य कर रहे थे। राजू को प्रदूषण के प्रकार पर निबन्ध लिखने को मिला था। कक्षा में अध्यापिका ने प्रदूषण के बारे में समझाया तो था, पर राजू उसे लिपिबद्ध नहीं कर पा रहा था। हारकर उसने बाकी गृह कार्य तो किया, पर निबन्ध पर अटका रहा। 
रात का भोजन करने के बाद जब राजू दादी के पास कहानी सुनने के लिए नहीं आया तो दादी को चिन्ता हुई। उन्होंने मुनिया से पूछा तो उन्हें असली बात पता चली कि वह अभी निबन्ध नहीं लिख पाया है और इस चिन्ता में डूबा है कि कल उसे टीचर से डाँट न खानी पड़े। दादी ने प्यार से उसे अपने पास बुलाया। उसकी समस्या सुनी और गम्भीरता से पूछा, "आज प्रदूषण पर कहानी सुनोगे क्या? राजू प्रसन्न हो उठा उसे पता था कि उसकी समस्या का कोई न कोई हल दादी की कहानी में अवश्य छुपा होगा। सब भूलकर राजू दादी से लिपट गया। ऐसा कभी हो सकता है क्या दादी कि मैं आपसे कहानी सुनना भूल जाऊँ।" दादी ने गला साफ किया और कहानी शुरू की सुन्दरवन की एक सुबह रीतू खरगोश, नीलू बन्दर, चुलबुल गौरैया और नटखट हिरण ने पिकनिक मनाने की सोची। सब ने फटाफट आपस में काम बाँट लिया। नीलू बन्दर को मीठी खीर चुलबुल गौरैया को अंकुरित चने नटखट हिरण को पूरियों और रीतू खरगोश को सलाद लाने का निश्चय हुआ। चारों मित्र बड़े मन से अपने-अपने घरों से सारा खाने का सामान बैठने के लिए दरी और खेलने की सामग्री लेकर नदी किनारे चल पड़े। पर यह क्या! नदी के किनारे काफी गन्दगी पड़ी थी और नदी का पानी भी काफी काला दिख रहा था। चारों के चेहरे मायूस हो गए। चारों मित्र वहाँ से हटकर थोड़ा घने जंगल की तरफ गए तो वहाँ कान फोड़ू लाउडस्पीकर लगे थे, जिसका कर्कश संगीत किसी को भी परेशान करने के लिए काफी था। पता चला, वहाँ राजा चीता अपने बच्चों का जन्म-दिन मना रहे थे। मित्रों को मायूस देखकर रीतू खरगोश ढाढस बंधा ते हुए बोला, "अरे! जंगल में एक जगह ऐसी है, जहाँ बहुत सारे फूल खिले हैं और हवा में सुगन्ध फैली हुई है। मैं बहुत पहले वहाँ गया था। चारों उसके बताए स्थान पर पहुँचे तो हवा में फैली दुर्गन्ध के मारे साँस लेना मुश्किल हो गया वहाँ फूलों के स्थान पर कचरे का ढेर पड़ा हुआ था। चारों पिकनिक के लिए जगह खोजते खोजते सुन्दरवन की सीमा पर जा पहुँचे, जहाँ से नन्दनवन शुरू होता था। वहाँ रीतू का मित्र मीतू रहता था। चारों सोच ही रहे थे कि अब क्या करें, कहाँ जाएँ? तभी संयोगवश मीतू उधर से गुजर रहा था। उसने अपने मित्र रीतू को देखा तो बहुत प्रसन्न हुआ। सारी समस्या जानकर वह उन सबको नन्दनवन में नदी के किनारे ले गया। नदी के साफ-सुथरे किनारे व बहने वाली शीतल मन्द सुगन्धित वायु से चारों का मन प्रसन्न हो उठा। अब पिकनिक में मीतू भी शामिल हो गया। चारों नन्दनवन के सुन्दर वातावरण की प्रशंसा करने लगे। खाना खत्म कर मीतू को 'धन्यवाद' देकर डिस्पोजेबल बर्तनों को वहीं फेंक चारों सुन्दरबन की ओर लौटने लगे। तभी मीतू ने उन्हें पीछे से आवाज दी और उनके फैलाए कचरे की ओर संकेत किया। चारों को अपनी भूल का एहसास हुआ। नीतू उन्हें अपने घर ले गया। उसने बताया कि, "नन्दनवन में कचरा फेंकने की निर्दिष्ट जगह है। सुन्दरवन में शेर दादा की फैक्ट्री का सारा रासायनिक अवशेष नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है, जो जल प्रदूषण यानी जल में अवांछित द्रव्यों के समावेश का कारण बनता है। इसी प्रकार कचरे के उचित प्रबन्धन न होने के कारण भूमि प्रदूषण और शोर-शराबे से पैदा होने वाले ध्वनि प्रदूषण का मजा तो तुम सब चख ही चुके हो। धुँआ छोड़ने वाले वाहनों का नियमितीकरण न होने के कारण वायु प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है। तुम्हारे हाथी दादा का महल बनवाने में न जाने कितने पेड़ों की बलि चढ़ गई, इसलिए अगर तुम लोग चाहते हो कि सुन्दरवन भी नन्दनवन की तरह चहके महके तो स्वयं के साथ-साथ सभी को जागरूक करना पड़ेगा।" 
कहानी समाप्त होते ही राजू तेजी से निबन्ध पूरा करने भागा उसकी इस फुर्ती पर दादी और मुनिया एक साथ हँसने लगी। 

#संस्कार_सन्देश - 
प्रदूषण हटाओ, धरा बचाओ।

कहानीकार-
डॉ #सीमा_द्विवेदी (स०अ०)
कंपोजिट विद्यालय कमरौली जगदीशपुर, अमेठी (उ०प्र०)

✏️संकलन
टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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