47/2026, बाल कहानी- 18 मार्च
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 47/2026
*18 मार्च 2026 (2026)*
#बाल_कहानी - #हौसला
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सुमेर सिंह नामक किसान अपने परिवार के साथ गाँव में रहते थे। उनके दो बेटे थे। उनका छोटा बेटा अमर बहुत ही अच्छा धावक था। गाँव में जब भी दौड़ होती थी उनका बेटा ही जीतता था। गाँव में सभी लोग अमर की तारीफ करते थे। सब लोग कहते थे कि, "अमर को आगे बढ़ने का मौका मिले तो काफी आगे जा सकता है।"
एक दिन गाँव के लोगों ने अखबार में एक खबर देखी, जिसमें लिखा हुआ था कि शहर में दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। जो भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहे, वह अपना फॉर्म भर सकता है। जीतने वाले को पुरस्कार दिया जाएगा। सभी गाँव वालों ने अमर के पिता सुमेर सिंह से कहा, "सुमेर सिंह! अमर का नाम दौड़ प्रतियोगिता में लिखवा दो।" सुमेर सिंह ने अपने बेटे अमर से कहा, "बेटा! तुम दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा ले लो।"
अमर ने कहा, "पिताजी! मैं प्रतिभाग तो करना चाहता हूँ, लेकिन मुझे बहुत डर लग रहा है अगर मैं हार गया तो क्या होगा बेइज्जती हो जाएगी।" सुमेर सिंह ने कहा, "बेटा! जीतना-हारना तो बाद की बात है। हम किसी काम में प्रतिभाग न करें तो हम अपनी हार-जीत का फैसला ही नहीं कर पाएँगे। बेटा! जब युद्ध होता है तब राजा युद्ध में लड़ने जाता है। उसे नहीं पता होता है कि वह हारेगा या जीतेगा। सबसे पहले कर्म महत्वपूर्ण है।"
अमर ने कहा, "ठीक है पिताजी! आपने कहा है तो मैं जरूर प्रतिभाग करूँगा। आपकी बात सुनकर मुझे हौसला मिला है।"
अमर ने अपना नाम दौड़ प्रतियोगिता में लिखवा लिया। अमर बहुत अच्छा दौड़ता था, वह प्रतियोगिता में प्रथम आया। उसने अपने गाँव का नाम रोशन किया। अमर के पिता सुमेर सिंह बहुत खुश थे। जब उनका पुत्र उनके सामने पुरस्कार लेकर आया। तब पिताजी को बहुत खुशी हुई। अमर अपने पिता के गले लग गया। अमर मन ही मन में कह रहा था, "पिताजी! अगर आपने मुझे हौसला नहीं दिया होता तो यह पुरस्कार मेरे हाथ में नहीं होता।" अमर सिंह ने कहा, "चलो बेटा!अब गाँव चलते हैं। गाँव में चलकर सबको मिठाई भी खिलानी है।" ऐसा कह कर दोनों गाँव की तरफ चल दिए।
#संस्कार_सन्देश -
किसी भी कार्य के लिए दिया गया प्रोत्साहन ही सफलता की सीढ़ी बनता है।"
कहानीकार -
#शालिनी (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय- कूँड़
विकास क्षेत्र- करहल
जनपद- मैनपुरी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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