45/2026, बाल कहानी- 16 मार्च

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 45/2026
*16 मार्च 2026 (सोमवार)*
#बाल_कहानी- #अनोखा_खजाना
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प्राचीन समय की बात है, राजा विक्रम के दो पुत्र थे- अजय और विजय। राजा अपने बेटों को जीवन का सबसे बड़ा पाठ सिखाना चाहते थे। 
एक दिन उन्होंने दोनों को बुलाया और सौ-सौ स्वर्ण मुद्राएँ (सोने के सिक्के) देते हुए कहा, "पुत्रों! यह धन लो और इसे ऐसी जगह निवेश करो, जो कभी खत्म न हो और जिसे कोई चुरा न सके। जो इस परीक्षा में सफल होगा, वही राज्य का उत्तराधिकारी बनेगा।"
बड़ा राजकुमार अजय बाजार गया। उसने सोचा, "ऐसी कौन सी चीज है जो खत्म नहीं होती? कीमती रत्न और गहने सबसे सुरक्षित हैं।" उसने उन मुद्राओं से दुर्लभ हीरा, पन्ना और सोने के आभूषण खरीद लिए। उसने उन्हें एक मजबूत लोहे की तिजोरी में बन्द कर दिया और पहरेदार लगा दिए। उसे पूरा विश्वास था कि उसका खजाना सुरक्षित है।
छोटा राजकुमार विजय बहुत शान्त स्वभाव का था। वह नगर के सबसे बड़े गुरुकुल में गया। उसने उन स्वर्ण-मुद्राओं को गरीब बच्चों की शिक्षा, दुर्लभ हस्तलिपियों को सहेजने और महान विद्वानों के साथ चर्चा करने में लगा दिया। उसने महीनों तक कठिन परिश्रम कर गणित, विज्ञान, राजनीति और नीतिशास्त्र का गहरा ज्ञान प्राप्त किया। जब वह खाली हाथ लौटा तो अजय उस पर हँसने लगा, "मूर्ख! तुमने सारा धन लुटा दिया, अब तुम्हारे पास दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है।"
कुछ वर्षों बाद पड़ोसी राज्य ने अचानक हमला कर दिया। युद्ध में राजा विक्रम की हार हुई और उन्हें सपरिवार जंगल भागना पड़ा। अजय की भारी तिजोरी शत्रु सैनिकों ने छीन ली। उसके पास न तो अब गहने थे और न ही उन्हें वापस पाने का कोई तरीका। वह दाने-दाने को मोहताज हो गया। लेकिन विजय बिल्कुल शान्त था। वह पास के एक दूसरे समृद्ध राज्य के दरबार में पहुँचा। वहाँ की सभा में एक बहुत कठिन समस्या पर चर्चा हो रही थी, जिसे बड़े-बड़े विद्वान नहीं सुलझा पा रहे थे। विजय ने अपने अर्जित ज्ञान और तर्कशक्ति से उस समस्या का ऐसा समाधान निकाला कि वहाँ के राजा दंग रह गए। राजा ने तुरन्त विजय को अपना प्रधान सलाहकार नियुक्त किया और उसे रहने के लिए महल और सम्मान दिया।
विजय ने अपने भाई अजय को भी अपने पास बुला लिया। तब अजय ने रोते हुए कहा, "भाई! मेरा धन तो शत्रुओं ने चुरा लिया, लेकिन तुम्हारी शिक्षा और बुद्धि को कोई नहीं छीन सका। आज मुझे समझ आया कि पिताजी ने क्यों कहा था कि ज्ञान ही सबसे बड़ी पूँजी है।"

#संस्कार_सन्देश -
सोना-चाँदी और खिलौने खो सकते हैं, लेकिन जो हम सीखते हैं, वह हमेशा हमारे साथ रहता है और बाँटने से बढ़ता है।

कहानीकार-
#नरेन्द्र_नाथ_पटेल (स०अ०)
कम्पोजिट विद्यालय सुरहन, भदोही (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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