पुस्तक कुछ कहती हैं

पुस्तक कुछ कहती हैं।
हाँ पुस्तक बहुत कुछ कहती हैं।।
पुस्तक है हम सब का मान,
करती हैं सब का उत्थान।
जो भी लेता इनसे ज्ञान,
उसका जीवन बन जाता महान।।
पुस्तक कुछ कहती हैं हाँ,
पुस्तक बहुत कुछ कहती हैं।।

सच्चा मित्र है कहलाती,
जीवन पथ पर सही राह दिखाती।
इनका साथ कभी ना छोड़ो,
हरदम इन से नाता जोड़ो।

पुस्तक कुछ कहती हैं,
हाँ पुस्तक बहुत कुछ कहती हैं।।
जब कभी जी गुरु की कमी लगे,
जीवन खाली खाली सा हो।
भर लो अपने अंतर्मन में,
पुस्तक में जो भी निधियाँ हों।।
पुस्तक कुछ कहती हैं हाँ,
पुस्तक बहुत कुछ कहती हैं।।

भरा है इनमें अनमोल खजाना,
जिसे महापुरुषों ने पहचाना।
महापुरुष कलाम की विरासत में भी,
केवल मिला पुस्तकों का ही खजाना।।
पुस्तक कुछ कहती हैं,
हाँ पुस्तक बहुत कुछ कहती हैं।।
विश्व पुस्तक दिवस पर बच्चों देते हैं यही संदेश ,
शामिल कर लो जीवन में पुस्तक का ही उज्जवल परिवेश।।

रचयिता
सीमा श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय हासिमपुर भेदपुर,
शिक्षा क्षेत्र-हसवा,
जनपद-फतेहपुर।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews