मैं किताब हूँ
मैं एक किताब हूँ,
ज़िन्दगी का हिसाब हूँ,
सिखाती हूँ मैं हर एक तरीका,
बोल चाल व जीने का सलीका,
तहजीब और इज़्ज़त है मुझमें समाई,
लेती हूँ हर तमीज़दार के मन में अंगड़ाई।
हूँ एक आईना मैं सबको दिखाती,
फिर भी अहसान न किसी को जताती।
जो न पढ़ सके तो चीज एक बेजान हूँ मैं,
जो पढ़ लो मुझे तो बड़ी जानदार हूँ मैं।
कदरदान के लिए नशा ए शराब हूँ मैं,
बेकदरों के लिए एक रद्दी किताब हूँ मैं।
रचयिता
आमिर फारूक,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय औरंगाबाद माफ़ी,
विकास खण्ड-सालारपुर,
जनपद-बदायूँ।
ज़िन्दगी का हिसाब हूँ,
सिखाती हूँ मैं हर एक तरीका,
बोल चाल व जीने का सलीका,
तहजीब और इज़्ज़त है मुझमें समाई,
लेती हूँ हर तमीज़दार के मन में अंगड़ाई।
हूँ एक आईना मैं सबको दिखाती,
फिर भी अहसान न किसी को जताती।
जो न पढ़ सके तो चीज एक बेजान हूँ मैं,
जो पढ़ लो मुझे तो बड़ी जानदार हूँ मैं।
कदरदान के लिए नशा ए शराब हूँ मैं,
बेकदरों के लिए एक रद्दी किताब हूँ मैं।
रचयिता
आमिर फारूक,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय औरंगाबाद माफ़ी,
विकास खण्ड-सालारपुर,
जनपद-बदायूँ।

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