पृथ्वी दिवस

हर साल 22 अप्रैल को दुनिया भर में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। इसे पहली बार 1970 में मनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक बनाना है। इस साल पृथ्वी दिवस की थीम “Climate Action,” है, जबकि पिछले साल इसका थीम  “Protect Our Species,” था।
इस साल पृथ्वी दिवस के 50 साल पूरे हो रहे हैं\ इससे पहले पृथ्वी दिवस दो अलग-अलग दिन मनाया जाता था, जहाँ 21 मार्च को अंतराष्ट्रीय पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता था, जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ की मान्यता प्राप्त थी। वहीं, 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता रहा है, लेकिन 22 अप्रैल को 1970 से दुनिया भर में 192 से अधिक देशों के निवासी एक साथ पृथ्वी दिवस मनाते हैं। इस साल पृथ्वी दिवस के 50 साल पूरे हो रहे हैं।
हमारे सौरमंडल में केवल धरती ही ऐसा ग्रह है, जहाँ जीवन है, जहाँ नदी, झरने, पहाड़, वन, अनेक जंतु प्रजातियाँ हैं और जहाँ हम सब मनुष्य भी हैं। लेकिन हम सब के लालच और लापरवाही ने ना केवल दूसरी जीव प्रजातियों के लिए बल्कि खुद अपने लिए और संपूर्ण धरती के लिए संकट पैदा कर दिया है। ऐसे में पृथ्वी दिवस जैसे आयोजन हमें जागरूक करने के लिए जरूरी हैं। आइए इस पृथ्वी दिवस पर हम धरती की पुकार सुनें और इसे स्वच्छ-सुरक्षित बनाए रखने में अपना भरपूर योगदान दें।

ॐ गिरयस्ते पर्वता हिमवन्तोऽरण्यं ते पृथिवि स्योनमस्तु।
बभ्रुं कृष्णां रोहिणीं विश्वरूपां ध्रुवां भूमिं पृथिवीमिन्द्रगुप्ताम्।
अजीतेऽहतो अक्षतोऽध्यष्ठां पृथिवीमहम्।।
अर्थ -
माता पृथ्वी आपको प्रणाम है। हे माँ पृथ्वी, आपके पर्वत, और बर्फ से ढकी चोटियाँ, घने जंगल हमें शीतलता  और सुखानुभुति  प्रदान करें।  हे माँ आप अपने कई रंगों के साथ विश्वरूपा हो  – भूरा रंग (पहाड़ों की), नीला रंग( समुद्र के जल का) , लाल रंग (फूलों का); (लेकिन इन सभी विस्मयकारक रूपों के पीछे) हे माँ धरती, आप ध्रुव की तरह हैं- दृढ़ और अचल और आप इंद्र द्वारा संरक्षित हैं।  आपकी नींव जो कि अविजित है, अचल है, अटूट है, उस पर मैं  दृढ़ता से खड़ा हूँ।

भारतीय पौराणिक ग्रंथों में पृथ्वी को माँ के समतुल्य माना गया है।

"माता भूमि पुत्रोSहं पृथिव्यां”
 पृथ्वी मेरी माता है और मैंं उसका पुत्र हूँ।"

यह हम सबकी आश्रयदाता है। इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। इस पर मौजूद बेशुमार संसाधन, उपहार के रूप में हम सबको मिले हैं। प्रकृति ने इस पर जल, नदियाँ, पहाड़, हरे-भरे वन और धरती के नीचे छिपी हुई खनिज संपदा धरोहर के रूप में हमारे जीवन को सहज बनाने के लिए प्रदान किए हैं। हम अपनी मेहनत से धन तो कमा सकते हैं लेकिन प्रकृति की इन धरोहरों को अथक प्रयास करने के पश्चात भी बढ़ा नहीं सकते। इसलिए हम सबको इन धरोहरों को संजोने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। हमारी धरती बहुत ही सुंदर है। इसका एक बड़ा भाग पानी से ढका हुआ है। पानी की अधिकता के कारण ही इसे ब्ल्यू प्लेनेट के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन हम सबकी ही लापरवाही के चलते ग्लोबल वार्मिंग और पॉल्यूशन की वजह से यह सुंदर ग्रह अब खतरे में नजर आ रहा है। इसको बचाने के लिए पृथ्वी दिवस जैसे जागरुकता बढ़ाने वाले आयोजनों और अभियानों की आवश्यकता है।


पृथ्वी दिवस की परिकल्पना

पृथ्वी को संरक्षण प्रदान करने के लिए और सारी दुनिया से इसमें सहयोग और समर्थन करने के लिए पृथ्वी दिवस प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन को 192 देशों ने अपना समर्थन प्रदान किया है। इस दिन विश्व स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई समुदाय और एनजीओ, पृथ्वी सप्ताह का समर्थन करते हुए पूरे सप्ताह विश्व के पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर पृथ्वी को बचाने के लिए अनुकरणीय कदम उठा रहे हैं। पृथ्वी दिवस की परिकल्पना में हम उस दुनिया का ख्वाब साकार होना देखते हैं, जिसमें दुनिया भर की हवा और पानी प्रदूषणमुक्त होगा। नदियाँ अपनी बदहाली पर आँसू नहीं बहाएँगी। मिट्टी, बीमारियाँ नहीं वरन सोना उगलेगी। धरती रहने के काबिल होगी। इस तरह समाज स्वस्थ और खुशहाल होगा। तभी ऐसे दिनों को मनाने की सार्थकता है।

 प्रथम पृथ्वी दिवस

जब पहला पृथ्वी दिवस मनाया गया, तब यूनाइटेड स्टेट्स के दो हजार से अधिक कॉलेज, यूनिवर्सिटी और हजारों प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल के अनेक समुदायों ने इसमें भाग लिया और शांतिपूर्ण ढंग से पर्यावरण की गिरावट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। 22 अप्रैल 1970  से पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। इस पृथ्वी दिवस की शुरुआत ‘अमरीकी सिनेटर गेलार्ड नेलसन’ ने की है। इन्होंने सबसे पहले अमेरिका में होने वाले औद्योगिक विकास के कारण पर्यावरण पर होने वाले दुष्परिणामों पर अमरीका का लक्ष्य केन्द्रित किया था |
इन्होंने पूरे अमेरिकी समाज को एकसाथ करके नष्ट हो रही जैव विविधता और पर्यावरण को बचाने के लिए संघर्ष किया था। इस प्रकार सन 1970 से सम्पूर्ण विश्व में इस पृथ्वी दिवस की शुरुआत हुई।

वर्तमान दौर में पृथ्वी दिवस को एक पर्व की तरह दुनिया भर में मनाया जाने लगा है। यह हर साल एक अरब से अधिक लोगों के द्वारा मनाया जाता है और एक दिन की दिनचर्या को पर्यावरण के कार्य के लिए समर्पित किया जाता है। वर्तमान में स्वच्छ वातावरण का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है क्योंकि जलवायु में परिवर्तन विनाशकारी रूप धारण करता जा रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग

हमें इस बात को समझना होगा कि ग्लोबल वार्मिंग से पर्यावरण पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में जीवन संपदा को बचाने के लिए पर्यावरण को ठीक रखने के बारे में जागरूक रहना आवश्यक है। जनसंख्या की बढ़ोतरी ने प्राकृतिक संसाधनों पर अनावश्यक बोझ बढ़ा दिया है। इसलिए इसके संसाधनों के उचित प्रयोग के लिए पृथ्वी दिवस जैसे कार्यक्रमों का महत्व बढ़ गया है। आईपीसीसी अर्थात जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल के मुताबिक 1880 के बाद से समुद्र स्तर 20 प्रतिशत बढ़ गया है और यह लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यह 2100 तक बढ़कर 58 से 92 सेंटीमीटर तक हो सकता है, जो पृथ्वी के लिए बहुत ही खतरनाक है। इसका मुख्य कारण है ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ग्लेशियरों का पिघलना, जिसके करण पृथ्वी जलमग्न हो सकती है। आईपीसीसी के पर्यावरणविदों के अनुसार 2085 तक मालदीव पूरी तरह से जलमग्न हो सकता है।

पृथ्वी दिवस का महत्व मानवता के संरक्षण के लिए बढ़ जाता है, यह हमें जीवाश्म ईंधन के उत्कृष्ट उपयोग के लिए प्रेरित करता है। इसको मनाने से ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरुकता के प्रचार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जो हमारे जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रेरित करता है। ऐसे आयोजन ऊर्जा के भंडारण और उसके महत्व को बताते हुए उसके अनावश्यक उपयोग के लिए भी हमें सावधान करता है। 1960 के दशक में कीटनाशकों और तेल के फैलाव को लेकर जिस तरह से जनता ने जागरुकता दिखाई थी, उस जागरुकता की वजह से नई स्वच्छ वायु योजना बनी थी। इस वजह से अब जो भी नया विद्युत संयंत्र शुरू होता है, उसमें कार्बन डाइऑक्साइड को कम मात्रा में उत्सर्जित करने के लिए अलग यंत्र लगाया जाता है, जिससे पर्यावरण में इसका कम फैलाव हो और नुकसान कम हो।

लेखक
माधव सिंह नेगी,
प्रधानाध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय जैली,
विकास खण्ड-जखौली,
जनपद-रुद्रप्रयाग,
उत्तराखण्ड।

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