मैं पुस्तक हूँ
शब्दों का भंडार हूँ,
अक्षरों की खान हूँ,
मैं उजाला बाँटती,
ज्ञान का सागर समेटे,
मैं तुम्हारी पुस्तक हूँ।
हँसती भी हँसाती भी
रोती भी रूलाती भी
गुनगुनाती सी कभी,
भाव रखती हूँ सभी,
मैं तुम्हारी पुस्तक हूँ।
इतिहास मेरे पास है,
भूगोल मेरे साथ है,
साहित्य को लपेटे,
मैं भविष्य वर्तमान हूँ,
मैं तुम्हारी पुस्तक हूँ।
ज्योतिष भी विज्ञान भी,
हूँ गणित की गिनतियाँ,
हर विषय का ज्ञान हूँ
मैं तुम्हारी पुस्तक हूँ।
रचयिता
राजबाला धैर्य,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिरिया नारायणपुर,
विकास खण्ड-क्यारा,
जनपद-बरेली।
अक्षरों की खान हूँ,
मैं उजाला बाँटती,
ज्ञान का सागर समेटे,
मैं तुम्हारी पुस्तक हूँ।
हँसती भी हँसाती भी
रोती भी रूलाती भी
गुनगुनाती सी कभी,
भाव रखती हूँ सभी,
मैं तुम्हारी पुस्तक हूँ।
इतिहास मेरे पास है,
भूगोल मेरे साथ है,
साहित्य को लपेटे,
मैं भविष्य वर्तमान हूँ,
मैं तुम्हारी पुस्तक हूँ।
ज्योतिष भी विज्ञान भी,
हूँ गणित की गिनतियाँ,
हर विषय का ज्ञान हूँ
मैं तुम्हारी पुस्तक हूँ।
रचयिता
राजबाला धैर्य,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिरिया नारायणपुर,
विकास खण्ड-क्यारा,
जनपद-बरेली।

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