विश्व पुस्तक दिवस

यूनेस्को ने शुरू किया था,
१९९५ में पुस्तक दिवस पहला।
विश्व पुस्तक दिवस का नाम,
 दिया था कितना अलबेला।।

पश्चिमी राष्ट्र का महान लेखक,
जिसका जन्म मरण, एक ही तिथि
उसी जयन्ती श्रृद्धांजलि पर,
शेक्सपियर था बना अतिथि।।

२३ अप्रैल १५६४ में
उदय‌ हुआ एक तारा था।
२३ अप्रैल १६१६ को,
अस्त हुआ यह तारा था।।

भारत में भी २००१ से,
यह दिवस मनाना शुरू हुआ ।
अहिल्या केन्द्रीय पुस्तकालय,
सर्वोदय साहित्य भण्डार हुआ।।

जिन-जिन पुस्तकों को पढ़ते तुम
उन-उन रचनाकारों से मिलते।
अन्तर्मन के गहन तिमिर को,
प्रकाशमान तुम करते जाते।।

आध्यात्मिक, भौतिक या दर्शन हो
सामाजिक या भाषाई किताब हो
अनुभव, ज्ञान, बोध प्रदाता
पढ़कर पाठक लाजवाब हो।।

विभिन्न थीमों में विश्व मनाएँ,
दिवस यह हर्षोल्लास से।
प्रगति पथ पर अनवरत चले,
विश्व का मानव समुल्लास से।।

यह जो पढ़ते हो तुम किताब,
मानव प्रगति का यही है हिसाब।
डूबता जब मानव गहन तम में,
पुस्तक बन जाती है आफताब।।

आओ भारत के बच्चों में,
पुस्तक पढ़ने की आदत डालें।
पुस्तक प्रेम सिखाकर  इनको,
महान  विचारक‌  बना  डालें।।
                   
रचयिता
बी0 डी0 सिंह,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्रथमिक विद्यालय मदुंरी,
विकास खण्ड-खजुहा,
जनपद-फतेहपुर।

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