धरती है रब का इनाम

यह धरती है रब का इनाम,
जिस पर हैं रहते जीव तमाम।
जल, सूर्य, अग्नि, पवन, प्रकाश,
हैं यह सब प्रकृति के गुलाम।
जो इसको हर पल छेड़ोगे,
नित नई आफत तुम झेलोगे
गर कर लो मिलकर आज प्रण,
पृथ्वी की रक्षा करो हर क्षण।
यह तुम पर प्यार लुटा देगी,
सुख, शांति और समृद्धि देगी।
विनम्र अपील "आमिर" की है यह,
करो पृथ्वी की रक्षा, वरदान है यह।

रचयिता 
आमिर फारूक,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय औरंगाबाद माफ़ी,
विकास खण्ड-सालारपुर, 
जनपद-बदायूँ।

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