धरती माता को नमन करें
हम सब की धरती माता, आओ इसे नमन करें,
बनी रहे इसकी हरियाली, आओ ऐसे काम करें।
आओ हम सब मिलकर, एक-एक तो पेड़ लगाएँ,
करें धरती माँ का श्रृंगार, कोना-कोना हम महकाएँ।
धरती माँ तो सबकी रक्षक, क्यों बने हैं इसके भक्षक,
यह वसुन्धरा देती सर्वस्व, चलो बनें इसके संरक्षक।
प्रकृति ने जो हमें दिया है, हम सब उसका सम्मान करें,
न छेड़ो कुदरत को, अन्यथा ये और बुरा परिणाम करे।
मानवता जगाये कुछ अपनी कुदरत से सब प्रेम करें,
नही तो माँ पछताएगी, अब हम एक पल न देर करें।
रचयिता,
आराधना,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मुरारपुर,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।
बनी रहे इसकी हरियाली, आओ ऐसे काम करें।
आओ हम सब मिलकर, एक-एक तो पेड़ लगाएँ,
करें धरती माँ का श्रृंगार, कोना-कोना हम महकाएँ।
धरती माँ तो सबकी रक्षक, क्यों बने हैं इसके भक्षक,
यह वसुन्धरा देती सर्वस्व, चलो बनें इसके संरक्षक।
प्रकृति ने जो हमें दिया है, हम सब उसका सम्मान करें,
न छेड़ो कुदरत को, अन्यथा ये और बुरा परिणाम करे।
मानवता जगाये कुछ अपनी कुदरत से सब प्रेम करें,
नही तो माँ पछताएगी, अब हम एक पल न देर करें।
रचयिता,
आराधना,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मुरारपुर,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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