पृथ्वी दिवस मनाएँगे
भौतिकवादी मानव की क्रूर,
शमशीरों ने क्या कर डाला।
हरी-भरी इस धरती का,
कलेजा छलनी कर डाला।।
बिलख रही है घायल धरती,
इसकी रक्षा कौन करे।
इसके आँचल में पलता जो मानव,
अब बैठा है मौन धरे।।
धरती की रक्षा के खातिर,
अब कुछ ऐसा करना होगा।
प्रदूषण को दूर भगाकर के,
हरियाली को लाना होगा।।
आओ मिलकर करें प्रतिज्ञा,
अपनी धरती को बचाएँगे।
करें जागरूक जन-जन को,
हम पृथ्वी दिवस मनाएँगे।।
रचयिता
अशोक कुमार,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट प्राथमिक विद्यालय रामपुर कल्याणगढ़,
विकास खण्ड-मानिकपुर,
जनपद-चित्रकूट।
शमशीरों ने क्या कर डाला।
हरी-भरी इस धरती का,
कलेजा छलनी कर डाला।।
बिलख रही है घायल धरती,
इसकी रक्षा कौन करे।
इसके आँचल में पलता जो मानव,
अब बैठा है मौन धरे।।
धरती की रक्षा के खातिर,
अब कुछ ऐसा करना होगा।
प्रदूषण को दूर भगाकर के,
हरियाली को लाना होगा।।
आओ मिलकर करें प्रतिज्ञा,
अपनी धरती को बचाएँगे।
करें जागरूक जन-जन को,
हम पृथ्वी दिवस मनाएँगे।।
रचयिता
अशोक कुमार,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट प्राथमिक विद्यालय रामपुर कल्याणगढ़,
विकास खण्ड-मानिकपुर,
जनपद-चित्रकूट।

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