विश्व पृथ्वी दिवस

तेरे  सुमन  से  जग  विख्याता
तुझको नमन हे!  पृथ्वी  माता।।

स्वच्छ सांची से तन-मन को,
पुलकित  करने  वाली  है
तेरी  ममता  की  छाँवों में
हरे  -  भरे    वृक्षों     की
शोभा   बड़ी   निराली   है
जल जीवन तेरा सबको भाता
तुझको नमन हे! पृथ्वी माता।।

शस्य  श्यामला  धरा  कहीं पर
कहीं   पर्वत  और   पठार    हैं
तेरी गोदी में श्रीराम का तीरथ
तू सबसे बड़ी ममता सी कीरत
तेरे   दिये  समीर  से  सब  जन
जग में जीवन की प्यास बुझाता
तुझको नमन हे! पृथ्वी माता।।

भले आसमाँ अनेक रंग धरे
तुझको  ही  सब  सुहाता  है
कौन सा जीव किस तरह बने
तू  जननी  बन  जन्माती  है
"व्याकुल"  विनय  करता  है
करें  न  हम  तुझको  खंडित
यह स्वच्छ भाव मन में आता
तुझको नमन हे! पृथ्वी माता।।

रचयिता
दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल,
प्रधानाध्यापक,
संविलियत विद्यालय सोनवल, 
विकास खण्ड-लक्ष्मीपुर,
जनपद-महराजगंज

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