पुस्तकें हमारी सच्ची साथी

   आज 23 अप्रैल को हम वैश्विक पुस्तक दिवस मनाते हैं। आज का दिन हम लोगों के लिये बेहद खास है। आज तक हम जो भी बन पाए हैं, उसमें किताबों का योगदान तो अतुलनीय है। हमारा बचपन मोबाइल व इंटरनेट की दुविधा में नहीं बीता, हमारी साथी तो किताबें ही थीं।
        विश्व भर में 100 से अधिक देशों में चिन्हित विश्व पुस्तक दिवस यूनेस्को की एक पहल है जिसका उद्देश्य पुस्तकों और पढ़ने की आदत को आगे बढ़ाना है, विशेष रूप से हमारे समाजों के युवा सदस्यों के बीच। इस साल की थीम है - दस लाख कहानियाँ साझा करने के लिए।
       
हमारी सरकार ने भी पढ़ेगा भारत, तभी तो बढ़ेगा भारत के तहत हर विद्यालय में एक लाइब्रेरी बनवाई, जिनमें बच्चों को उनकी पसंद की किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्सहित किया जाता है। बच्चे इन किताबों को पढ़कर अपने ज्ञान का विस्तार करें एवं अपने कोमल विचारों से नए विचारों को जोड़ के अपने कल्पना के संसार को आगे बढ़ाएँ। अपने ज्ञान के बीज को इस धरती पर फूटने दें।

        आज टीचर बनने के उपरांत मेरा सबसे बड़ा उपकरण किताबें ही हैं, जो नित नया ज्ञान प्रदान करके मुझे अपने बच्चों को पढ़ाते हुए सीखने का नित नया अवसर प्रदान करती हैं। कहा भी गया है कि लोग झूठ बोले सकते हैं, धोका दे सकते हैं लेकिन किताबे आपकी सच्ची मित्र होती हैं।
        दुनिया मे सबसे बड़ा दान शिक्षा दान होता है जो हमें इन्हीं किताबों को पढ़के ही हुआ है, जिसे हम आज सौभाग्य से अपने बच्चों को दे रहे हैं।
        आज डिजिटल दुनिया है। आज हम किताबों को अपने साथ अपने मोबाइल या लैपटॉप के साथ चाहे जहाँ चाहे वहाँ पढ़ सकते हैं। इसी का परिणाम है कि आज सरकार द्वारा इस महामारी में ऑनलाइन क्लासेज दी जा रही हैं, जहाँ सरकार ने डिजिटल इंडिया का सहारा लेकर सारी किताबें ऑनलाइन उपलब्ध करा दी हैं जिससे शिक्षा के प्रसार में कोई बाधा उत्पन्न न हो।

लेखिका
अंजली मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय असनी प्रथम,
शिक्षा क्षेत्र-भिटौरा,
जनपद-फतेहपुर।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews