हमारी धरा

पृथ्वी हमारी धरा, यानि मात्र एक खगोलीय आकाशगंगा का मात्र पिण्ड नहीं बल्कि सबको धारण किये हुए एक अभूतपूर्व संरचना की स्वामिनी हमारी माँ है।
हम सभी पंचभूत तत्वों आकाश, अग्नि, वायु, जल एवं पृथ्वी से मिलकर ही तो बने हैं, इन पाँचो में पृथ्वी को माँ की संज्ञा प्राप्त है। माँ केवल शब्द नहीं है, हम सबका जीवन है। जो अपना सबकुछ न्योछावर कर दे वह माँ ही है।
धरती हमारी माँ है माँ।

धरती, धरा, पृथ्वी, मही, मोदिनी, वसुंधरा, क्षमा, अवनि आदि चाहे जो भी नाम हो यह तो हमारी जननी है। सौर जगत का यह ग्रह जिसमें सभी प्राणी निवास करते हैं अपने आप में सबसे अलग और निराली है। पृथ्वी बडा व्यापक शब्द है जिसमें सूर्य, चंद्रमा, हवा, जल पहाड़, नदियाँ, हरे-भरे जंगल और अंतस में छिपी खनिज सम्पदा आदि अनेक कारक जुडे हैं। तभी तो भारतीय संस्कृति में वंदनीया पृथ्वी पूजनीय है। एक दिन हम सभी को इसमें समा जाना ही है।

दुनिया में पृथ्वी दिवस 21 मार्च और 22 अप्रैल को प्रतिवर्ष 1970से विश्व पृथ्वी दिवस के रूप में मनाने की परंपरा है जिसके प्रणेता अमरीकी सीनेटर श्री गेलार्ड वे लसन ने पर्यावरण को बचाने के लिए कहा था। परन्तु हमारे महात्मा गांधी जी बहुत पहले ही हमें यह कहा करते थे कि "पृथ्वी-वायु, जल और भूमि हमारे पूर्वजों से मिली सम्पति नहीं है बल्कि यह अगली पीढ़ी की धरोहर है, हम इसके रखवाले मात्र हैं। अतः हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि यह जैसी है वैसी ही हम अपनी अगली पीढ़ी को सौंपे।"
पृथ्वी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण का संरक्षण करना, लोगों को सचेत करना और जागरूक करना है। वैसे पृथ्वी दिवस वर्ष भर मनाना चाहिए परन्तु यह तो आपाधापी में संभव कम लगता है फिर भी हमारा कर्तव्य है कि यह चिंतन का दिन है, विषय है कैसे वसुन्धरा को बचाया जा सके।
पृथ्वी प्रकृति का रूप है और आज हम वैश्विक महामारी के दौर में घरों में बंद होकर अच्छी तरह से समझ गए हैं कि अगर प्रकृति अपने पर आ जाए तो विनाश क्षण भर में हो सकता है।
अतः प्रकृति को बचाने, पर्यावरण के संरक्षण हेतु ऐसी गतिविधियों को शामिल करना ही होगा जैसे पौधारोपण करना, स्वच्छता को अपनाना, ऊर्जा संरक्षण, वायु संरक्षण आदि सभी उपाय अपना कर अपनी धरा को बचा सकते हैं।
       क्योंकि ........
       धरा नहीं होगी तो सब
       धरा का धरा  रह जाएगा। 

लेखिका
मोनिका सिंह,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय मलवां प्रथम,
विकास खण्ड-मलवां,
जनपद-फतेहपुर।



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