किताबें

 होती सच्ची मित्र किताबें,
देती सच्चा साथ किताबें।
ज्ञान का हैं भण्डार किताबें,
देती हमको ज्ञान किताबें।
देती हर प्रश्न का उत्तर,
करती शांत जिज्ञासा हमारी।
कुछ रंग बिरंगी, कुछ सस्ती महँगी,
कुछ होती हैं हल्की भारी।
कुछ सुनाती गीत कहानी,
कुछ ले जाती पारियों के देश।
अलमारी में जब सजती किताबें,
कितनी सुंदर लगती किताबें।
कुछ शर्माती मुस्काती किताबें,
कुछ दिल को छू जाती किताबें।
कुछ रोमांच जगाती किताबें,
कुछ चिंतन का अंग बन जातीं।
कभी लहराएँ सागर नदियाँ इनमें,
कभी सूरज चन्दा दिखलातीं।
कभी गणित विज्ञान सिखातीं,
कभी  रॉकेट बनकर उड़ जातीं।
किताबें तुमसे कुछ कहना चाहे,
संग तुम्हारे रहना चाहे।
कितने सपने दिखाती किताबें,
सच्ची राह बताती किताबें।
बन जाए जो इनका अपना,
उनका पूरा होता हर सपना।

रचनाकार
सपना,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उजीतीपुर,
विकास खण्ड-भाग्यनगर,
जनपद-औरैया।

Comments

  1. बहुत सुन्दर रचना

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  2. बहुत सुन्दर रचना

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  3. बहुत सुंदर रचना,किताबें सच्ची मित्र होती हैं।।

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  4. आप सभी का सादर आभार

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  5. सुन्दर रचना

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