समाज का दर्पण
पुस्तक है समाज का दर्पण
दुनिया का विश्वास है,
पुस्तक से जीवन का तर्पण,
पुस्तक से ही आस है।
पग-पग मार्गदर्शन है करती
सबसे अच्छी सखी है बनती,
व्यक्तित्व को सजाती सँवारती
ज्ञान के भंडार है भरती।
नवीन सोच है विकसित करती
समयानुसार बदलती पुस्तक,
नये विचार है शामिल करती
भ्रम को दूर भगाती पुस्तक।
पुस्तक वो पारस की पथरी
जिससे सोना बनता थोथा भी,
सबसे महान उपकारी पुस्तक
सबका कल्याण है करती पुस्तक
आत्मविश्वासी स्वावलंबी बनाती
रंक को राजा है बनाती,
पुस्तक जैसा मित्र न कोई
जो न जानय मूरख होई।
ज्ञान की खिड़की खोलने को
नये विचार शामिल करने को,
नवीनतम किताबों के संग्रह को
नये लेखकों को आगे बढ़ाने को
मनाया जाता है प्रतिवर्ष,
23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस।
दुनिया का विश्वास है,
पुस्तक से जीवन का तर्पण,
पुस्तक से ही आस है।
पग-पग मार्गदर्शन है करती
सबसे अच्छी सखी है बनती,
व्यक्तित्व को सजाती सँवारती
ज्ञान के भंडार है भरती।
नवीन सोच है विकसित करती
समयानुसार बदलती पुस्तक,
नये विचार है शामिल करती
भ्रम को दूर भगाती पुस्तक।
पुस्तक वो पारस की पथरी
जिससे सोना बनता थोथा भी,
सबसे महान उपकारी पुस्तक
सबका कल्याण है करती पुस्तक
आत्मविश्वासी स्वावलंबी बनाती
रंक को राजा है बनाती,
पुस्तक जैसा मित्र न कोई
जो न जानय मूरख होई।
ज्ञान की खिड़की खोलने को
नये विचार शामिल करने को,
नवीनतम किताबों के संग्रह को
नये लेखकों को आगे बढ़ाने को
मनाया जाता है प्रतिवर्ष,
23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस।
रचयिता
सुमन पांडेय,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरी मनौटी,
शिक्षा क्षेत्र -खजुहा,

👌👌🙏
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