पुस्तकें ज्ञान अर्जन का खजाना

विद्या ददाति विनयम-विनयाद याति पात्रतामं।
पात्रत्वाद धनमान्पोती-धनाद धर्मस्ततः सुखं।।
    अर्थात विद्या से विनय-विनय से पात्रता/योग्यता, योग्यता से धन, धन से धर्म एवं धर्म से सुख की प्राप्ति। 
           क्या विद्या बिना किताब के मिल सकती है? यह बात बिल्कुल वैसी ही है कि क्या बिना मरे स्वर्ग मिलेगा?
       पुस्तकें ज्ञान अर्जन का सबसे सरल और सुलभ साधन है।मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जो एक समाज में रहता है और समाज में रहने के लिए ज्ञान की आवश्यकता है, पुस्तकें ज्ञान देती हैं, वह ज्ञान का सागर हैं। पुस्तकें हमारा मार्गदर्शन करती हैं। 

    पुस्तकें अमर हैं इनका कभी निधन नहीं होता। अच्छी-अच्छी पुस्तकें अब तक लाखों करोड़ों लिखी गईं, उनकों लिखने वाले मरकर चले गये किन्तु उनके विचारों को समेटे उनकी पुस्तकें आज भी अमर हैं। अपने साथ-साथ अपने लेखकों को भी अमर कर दिया है। 

    पुस्तकें ज्ञान अर्जन का खजाना हैं। यात्रा, पौराणिक कथाओं, खगोलशास्त्र, प्रोद्योगिकी, विज्ञान, साहित्य, इतिहास, फैशन सहित अनेक विषयों पर पुस्तके लिखीं गईं। इनमें अलग-अलग पहलुओं को छुआ। इस प्रकार ये ज्ञान का खजाना हैं। 
  गीता और रामायण आदि जैसी पुस्तकें हमें शांति का अनुभव कराती हैं। पुस्तकों का मूल्य रत्नों से भी बहुत-बहुत अधिक है क्योंकि पुस्तकें अंतः करण को उज्जवल बनाती हैं। 
    किताब पढ़ना हमें अकेले में विचार करने की आदत डाल सच्ची खुशी देती हैं। पुस्तके एक बगीचा हैं जिसे जेब में रखा जा सकता है। किताबों में इतना खजाना छुपा है जितना कभी कोई लुटेरा लूट नहीं सकता। विचारों के युद्ध को किताबों से अस्त किया जा सकता है। 
      पुस्तकें वो साधन हैं जिनके माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ा जा सकता है अर्थात दो संस्कृतियों का सेतु। किताबों को पढने से एकाग्रता बढती है,जो एक प्रकार की योग साधना। 
        किताबों को पढ़ने से आत्मविश्वास बढता है और यह व्यक्ति के व्यक्तित्व में प्रतिबिंबित होता है, ज्ञान की प्रचुरता को बढ़ाता है। किताबें ज्ञान के प्यासे व्यक्ति को संतुष्ट करती हैं। किताबें मानव जाति के लिए आशीर्वाद हैं। 

अंत में ......
        किताबें सदा ख्यालों को उडान देती हैं, 
         सारी जिंदगी सपनों से जोड़ देती हैं। 
किसी ने क्या खूब कहा है ....
        इश्क और सूकून......
        वो भी एक साथ,
        रहने दो मित्रों
        कोई अक्ल की बात करो
किताबों के अलावा कोई अन्य मित्र नहीं जो सिर्फ देता है, सिर्फ देता है......

लेखिका
मोनिका सिंह,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय मलवां प्रथम,
विकास खण्ड-मलवां,
जनपद-फतेहपुर।

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