सच्ची दोस्त किताबें

करती न बैर किसी से, देती सबको ज्ञान,
सच्चा दोस्त बन, सबको दिलाती सम्मान।

हैं ये ज्ञान का सागर, हैं ज्ञान का भंडार,
किताबें हैं मानव शिक्षण का आधार।

हमको मंजिल तक पहुँचाती हैं,
जीवन का गूढ़ रहस्य सिखलाती हैं।

हर प्रश्न का जवाब हमें बतलाती हैं,
किताबें आगे बढ़ना हमें सिखलाती हैं।

करती न बैर किसी से, देती सबको ज्ञान,
सच्चा दोस्त बन सबको दिलाती सम्मान।

है ऋषि-मुनियों का आशीर्वाद इनमें,
हैं कबीर के दोहे है वेदों का ज्ञान इनमें।

कुछ होती हैं हल्की, कुछ हैं वजन में भारी,
लेकिन इनमें है संसार की सारी जानकारी।

हमें कुछ नया करने का ख्वाब दिखाती हैं,
निस्वार्थ दोस्ती सिर्फ किताबें ही निभाती हैं।

करती न बैर किसी से देती सबको ज्ञान,
सच्चा दोस्त बन सबको दिलाती सम्मान।

रचयिता
नवनीत शुक्ल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैरवां द्वितीय,
शिक्षा क्षेत्र-हसवा,
जनपद-फतेहपुर।

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