पर्यावरण का महत्व

प्राकृतिक रूप में चारों ओर फैला आवरण जो पृथ्वी पर हमारे जीवन को प्रभावित करता है, पर्यावरण कहलाता है। यदि प्रकृति में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो वह वातावरण को पूरी तरह प्रभावित करती है जो कि मानव जीवन पर भी सीधा असर डालती है। क्योंकि सिर्फ और सिर्फ पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर मानव जीवन सम्भव है और पृथ्वी पर स्वस्थ जीवन का अस्तित्व बनाये रखने में पर्यावरण की अहम भूमिका होती है। इसलिए

पर्यावरण में व्याप्त जीवनदायिनी प्राणवायु के अस्तित्व को बनाये रखना बहुत आवश्यक है क्योंकि इसके असंन्तुलित होने की स्थिति में अन्य विषाक्त गैसों की मात्रा वातावरण में बहुत बढ जाती है और वही प्राणी जगत के लिए परेशानी का कारण बन जाती हैं। इसलिए इन विषाक्त गैसों के वातावरण में वृद्घि से बचाव के लिऐ अति आवश्यक है कि वृक्ष संपदा की हम लोग मिलकर रक्षा करें और इनकी घटती हुयी संख्या की पूर्ति के लिए अधिक से अधिक इनका रोपण करें। 

क्योंकि बिना पर्यावरण के कोई भी जीव जन्तु जीवन जीने के बारे में सोच भी नहीं सकता इसलिए हम सभी को अपने प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा के लिए और इसे सामान्य रूप से सुरक्षित रखने के लिए एक साथ शपथ लेनी चाहिए। क्योंकि प्रकृति ने मनुष्य को उसके जीवन जीने के लिए अनेक संसाधन उपलब्ध कराये हैं और इन संसाधनों की रक्षा करना तथा उनके अस्तित्व को सुरक्षित रखना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। क्योंकि हर व्यक्ति अपने पर्यावरण  में निवास करता है और उसका एक हिस्सा होता है तथा पर्यावरण में होने वाली विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से वह बहुत अधिक प्रभावित होता है इसलिए बहुत जरूरी है कि हमारा पर्यावरण साफ सुथरा रहे तथा पर्यावरण में किसी भी प्रकार का असंतुलन न उत्पन्न हो जिससे वह मानव जीवन के अस्तित्व में खतरा उत्पन्न करे।

लेखक
हरीओम सिंह,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय पेरई,
विकास खण्ड-नेवादा,
जनपद-कौशाम्बी।

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