विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस

लुप्त हो रहे वन्य जंतु,
औ लुप्त हो रही संस्कृति।

लुप्त हो रहे ताल पोखरे
नदियों की बुरी स्थिति।

बाग बगीचे, कूप बावड़ी
लुप्त हो रहे शनैःशनैः।

कंक्रीट के जंगल हैं अब
विस्तारित हो  वने वने।

वनराजा संकट में है अब
चीते की मन्द छलांगे।

प्यारी गौरैया खतरे में
जाने क्या हो आगे।

औद्योगिक उन्नति के आगे
भूले प्राचीन विरासत।

ताज बेचारा पीला हो गया
जिसने गढ़ी इबारत।

आओ कृत संकल्पित होकर
सहेजें अपनी  थाती।

विश्व प्रकृति संरक्षण दिन पर
शपथ लीजियो साथी।

प्रकृति माँ है, प्रकृति जीवन
प्रकृति ईश की रचना।

इसे बचाये, संरक्षण दें
सब मिल भाई-बहना।।

रचयिता
राजकुमार शर्मा,
प्रधानाध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय चित्रवार,
विकास खण्ड-मऊ,
जनपद-चित्रकूट।

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