मिशन शिक्षण संवाद क्या है ,विमल कुमार

मिशन संवाद

मिशन संवाद क्या है?

मिशन संवाद शिक्षकों को आपस में जोड़ कर सीखने - सिखाने के साथ कुछ नया करने के लिए प्रेरित कर सकारात्मक सोच तथा ऊर्जा का विकास कर संगठित करना है।

मिशन संवाद का उद्देश्य क्या है?

मिशन संवाद का उद्देश्य है -- '' शिक्षा  एवं शिक्षक के हित और सम्मान की रक्षा के लिए परिवेश, पढ़ाई, प्रचार और पावर के माध्यम से सदैव लोकतांत्रिक ढंग से उपाय खोजना,,

मिशन संवाद की उम्मीदः---

परिवेश:---
                मिशन संवाद हमेशा ऐसे शिक्षकों    का सम्मान करेगा। जिन्होंने अपनी सकारात्मक सोच, मेहनत, और ईमानदारी से अपने विद्यालय परिवेश को अपने घर के समान सुन्दर बनाने में कोई शंका, संकोच और नकारात्मक सोच को स्थान नहीं दिया। हमारे विद्यालय का परिवेश कम से कम इतना तो साफ- सुथरा होना ही चाहिए कि वहाँ नकारात्मकता अपना प्रभाव न जमा सके। इतने काम के लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता नहीं होती है। आवश्यकता होती है हमारे सोचने और काम करने के ढंग की। क्योंकि विद्यालय का परिवेश शिक्षा को भी प्रभावित करता है।  बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करने वाले चार कारकों परिवार, परिवेश, शिक्षक और मित्र में परिवेश का महत्पूर्ण स्थान है। इसलिए अपनी स्वेच्छा और समाजसेवी विचारधारा से यदि कोई शिक्षक विद्यालय में स्वयं का और जनसहभागिता से कुछ खर्च करके परिवेश सुन्दर बनाने का प्रयास करता है तो क्या वह सम्मान की जगह आलोचनाओं का पात्र होना चाहिए? जबकि एक शिक्षक के जीवन का महत्वपूर्ण समय विद्यालय में ही बीतता है। फिर उस परिवेश की सुन्दरता में शंका कैसी? वैसे भी भ्रष्टाचार और अंधविस्वास में दिये गये धन से विद्यालय के विकास और बच्चों के हित में खर्च किया गया धन कई गुना उपयोगी और शिक्षक के लिए हितकर साबित होता है। इससे धर्म हित,राष्ट्र हित तथा स्वहित के साथ सम्मान भी होता है। जो मानवीय जीवन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य होता है। इसलिए मिशन संवाद प्रत्येक शिक्षक से अपने विद्यालय परिवेश को सुन्दर और स्वच्छ रखने की आकांक्षा रखता है।

आज तक हमने ऐसा कोई विद्यालय और शिक्षक नही देखा जिसने विद्यालय के परिवेश को सुन्दर बनाते हुए विद्यालय का शिक्षण औसत से नीचे किया हो। यदि किसी के संज्ञान में ऐसा हो तो वह उस अपवाद को सार्वजनिक करे। अन्यथा काम करने वालों पर उंगली उठाना सिर्फ नकारात्मकता और कुंठा को ही दर्शाती है।

पढ़ाईः---
              मिशन संवाद हमेशा ऐसे शिक्षकों को नमन करेगा। जो शिक्षक के मुख्य कार्य शिक्षण का सम्मान करता है। जिन्हें पता है कि एक शिक्षक की लापरवाही बच्चों के जीवन को श्रीहीन बनने को मजबूर कर देता है। मानाकि शिक्षक आज सत्ता और व्यवस्था के हाथों मजबूर है। लेकिन इतना भी मजबूर नहीं कि अपने विद्यालय के बच्चों को न्यूनतम अधिगम के प्रयास न किये जा सकें। इसलिए हमारा प्रयास कम से कम न्यूनतम अधिगम बनाये रखने का उद्देश्य अनेकों अवरोधों और विरोधों के बीच भी होना चाहिए। तभी हम सब शिक्षा एवं शिक्षक के हित और सम्मान की रक्षा कर सकते हैं।

प्रचारः----    
                  मिशन संवाद हमेशा ऐसे शिक्षकों का सहयोग और सम्मान करता है। जो अपने प्रयासों और कार्यों को सत्ता, व्यवस्था और समाज के सामने पहुँचाने में संकोच नहीं करते है। क्योंकि भारतीय विद्वानों में शायद हमेशा से ये संकोच रहा है। कि उन्होंने अपने ज्ञान और कार्यों को गोपनीयता की श्रेणी में रखा। जिससे हजारों खोजों और सिद्धान्तों पर विदेशी होने की मुहर लग चुकी है। और हजारों गोपनीयता की खानों में दफन हो गये।   परिणाम में उन्हें गुलाम और गंवार की संज्ञा मिली। इसलिए मिशन संवाद के निवेदन है कि गुरुजनो संकोच और शंका छोड़ो, दुनियाँ का हिस्सा बनकर दुनियाँ से नाता जोड़ो। क्योंकि बुराई सदैव स्वप्रचारित होती है लेकिन अच्छाई के लिए हमेशा संघर्ष करना पढ़ता है। जैसे- गली गली गोरस बिके, मदिरा ठौर बिकाय।

वैसे भी
हमेशा से सत्ता और व्यवस्था की आँखों के सामने चाटुरारों और चमचों का काला पर्दा लगता रहा है। जहाँ से सिर्फ बुराई दिखाई देती है। यदि इस काले पर्दे से पार पाना है तो  आपको शंका और संकोच मिटा कर मिशन संवाद के साथ आना है। जिसे आपके सराहनीय प्रयासों और कार्यों को सत्ता और व्यवस्था के काले पर्दे के पार तक आगे पहुँचाना है।

पावर ( शक्ति):--- 
                            मिशन संवाद का मानना है कि सत्य की रक्षा के लिए सदैव साहस और शक्ति की आवश्यकता होती है। जो लोकतंत्र में सिर्फ संगठित रहने से ही प्राप्त की जा सकती है। क्योंकि बेसिक शिक्षा में सबसे अधिक वही पीड़ित है अथवा पीड़ित किया जाता है जो शिक्षा के लिए समर्पित है। पीड़ित करने के तरीके कुछ भी हो सकते हैं।  इसलिए हम सबको न्याय पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर  तक, सर्वदलीय और निर्दलीय की भावना के साथ गैर राजनीतिक, स्वयंसेवी उद्देश्य से, शिक्षा सेनानी बन कर, शिक्षक सेना के रूप में संगठित होकर सतत आगे बढ़ना है। जहाँ न चन्दा होगा, न किसी पद की प्रतिष्ठा होगी। होगा सिर्फ शिक्षा एवं शिक्षक के हित और सम्मान की रक्षा करने का स्वयंसेवी उद्देश्य। इस सेना का प्रत्येक वह शिक्षक सेनानी है जिसे प्रेम है अपने शिक्षक धर्म से, जिसे चिंता है शिक्षा के गिरते स्तर और शिक्षकों के गिरते सम्मान की।  ऐसे सभी सकारात्मक सोच और ऊर्जा के धनी शिक्षा सेनानियों को एक सूत्र में आप सब के सहयोग से जोड़ने का काम करेगा, मिशन संवाद।

मिशन संवाद का WhatsApp No. 9458278429

आपका सहयोगी
विमल कुमार
कानपुर देहात

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