ज्ञानरूपी दीपक
ज्ञानरूपी दीपक हम सब को जलाना होगा।
अज्ञानरूपी अंधेरा हम सब को मिटाना होगा।
स्वच्छता को अपनाना होगा।
हाथ जोड़कर प्रणाम कर शिष्टाचार को अपनाना होगा।
कर्म से मातृभूमि को देवतुल्य बनाना होगा।
पतित पावनि गंगा माँ को दूषित होने से बचाना होगा।
क्षमा, तप, संयम, शील, नम्र गुणों को धारण करना होगा।
पेड़-पौधे लगाकर धरती माँ को सजाना होगा।
राम-लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न जैसे भाई बनना होगा।
हर नारी को सीता माँ के आदर्शों पर चलना होगा।
फिर से धरती पर स्वर्ग बसाना होगा।
ज्ञानरूपी दीपक हम सब को जलाना होगा।
अज्ञानरूपी अंधेरा को हम सब को मिटाना होगा।
रचयिता
सुमन कुशवाहा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर,
विकास खण्ड-नेवादा,
जनपद-कौशाम्बी।
अज्ञानरूपी अंधेरा हम सब को मिटाना होगा।
स्वच्छता को अपनाना होगा।
हाथ जोड़कर प्रणाम कर शिष्टाचार को अपनाना होगा।
कर्म से मातृभूमि को देवतुल्य बनाना होगा।
पतित पावनि गंगा माँ को दूषित होने से बचाना होगा।
क्षमा, तप, संयम, शील, नम्र गुणों को धारण करना होगा।
पेड़-पौधे लगाकर धरती माँ को सजाना होगा।
राम-लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न जैसे भाई बनना होगा।
हर नारी को सीता माँ के आदर्शों पर चलना होगा।
फिर से धरती पर स्वर्ग बसाना होगा।
ज्ञानरूपी दीपक हम सब को जलाना होगा।
अज्ञानरूपी अंधेरा को हम सब को मिटाना होगा।
रचयिता
सुमन कुशवाहा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर,
विकास खण्ड-नेवादा,
जनपद-कौशाम्बी।

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