मातृत्व की मंशा

माता की समझें हम पीड़ा,
चलो उठाएँ हम इक बीड़ा।

बेटों की छोड़ें हम होड़,
माँ का मन यह देता तोड़।

दें सन्तुलित आहार सदा,
हो पूर्ण रूप से स्वस्थ हर माँ।

आशा, ANM से रहे संपर्क,
रखें दूर सब अपने कुतर्क।

बेटा-बेटी में भेद न पाएँ,
स्वस्थ शिशु की आस जगाएँ

हो न कुपोषित कोई बच्चा,
करें सभी संकल्प ये सच्चा

नव अंकुर का स्वागत कर लें,
नैतिकता हम उसमें भर लें।

चिंतामुक्त रहे हर माता,
सृजक वही राष्ट्र के कल का।

स्वस्थ मातृ और शिशु को बनाएँ,
तभी स्वस्थ नव पीढ़ी पाएँ।

हर बच्ची होगी जब शिक्षित,
दो-दो घर हो जाएँ प्रशिक्षित।

शिक्षित माँ तो है वरदान,
रखे शिशु और अपना ध्यान।

स्वस्थ हों सारे बेटा बेटी,
देश के दीपक देश की ज्योति।

रहें सुरक्षित जच्चा बच्चा,
यह ले लें हम प्रण अब सच्चा।

 माँ का रखें सदा हम ध्यान,
हर माँ को शत-शत प्रणाम।

रचयिता
पूनम दानू पुंडीर,
सहायक अध्यापक,
रा०प्रा०वि० गुडम स्टेट,
संकुल-तलवाड़ी,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली, 
उत्तराखण्ड।

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