स्वस्थ एवं आदर्श जीवन हेतु बच्चों की दिनचर्या

1

सुबह-सवेरे उठकर बच्चों करने हैं ये  काम।
 नियमित इन्हें अपना लिया तो बन जाओगे महान।
 प्रातः उठकर करना मात-पिता को प्रणाम।
 फिर शौचालय जाकर करना, शौच क्रिया का काम।
 हाथ धोना, मंजन करना, फिर करना स्नान।
 नियमित इन्हें अपना लिया तो बन जाओगे महान।

 स्वस्थ वस्त्र पहनना, करना फिर भोजन जलपान।
 प्रतिदिन तुम विद्यालय जाना, अर्जित करना ज्ञान।
गुरु की हर बात मानना, गुरु होता ईश सामान।
 नियमित इन्हें अपना लिया तो बन जाओगे महान।

 विद्यालय से वापस आकर, व्यवस्थित रखना अपना सामान।
 दोस्तों के संग खूब खेलना, फिर करना स्कूल का काम।
 काम पूरा करके ही उठना, रखना बस इतना सा ध्यान।
 नियमित इन्हें अपना लिया तो बन जाओगे महान।

 अतिथि यदि कोई घर आ जाए, करना हाथ जोड़ प्रणाम।
 आदर सहित उन्हें बिठाना, फिर देना जलपान।
 छल, कपट, चोरी, बेईमानी रहना इनसे अनजान।
 नियमित इन्हें अपना लिया तो बन जाओगे महान।

सुबह सवेरे उठकर बच्चों करने हैं ये  काम।
 नियमित इन्हें अपना लिया तो बन जाओगे महान।

2

स्वास्थ्य ही धन है।
 वरना जीवन निर्जन वन है।

 यदि जीवन आनंदमय बनाना है।
 तो नियमित दिनचर्या को अपनाना है।

 जब पक्षी कोलाहल करते चहुँओर।
 सूर्योदय से पूर्व निद्रा त्यागें प्रातःभोर।

 नित उठ करो ध्यान प्राणायाम योग।
दूर होंगे समस्त शारीरिक रोग।

 सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
 चिंता, तनाव सब दूर भागेगा।

 स्वयं न डालो संकट में अपनी जान।
 त्यागो गुटखा, सिगरेट, मदिरापान।

 फैशन, दिखावे की अंधी दौड़ में ना भागो।
 फास्ट फूड, जंक फूड सब त्यागो।

 फल, हरी सब्जियाँ, पौष्टिक आहार अपनाओ।
 स्वास्थ्य, सुंदरता, सुडौल शरीर पाओ।

 स्वच्छता का पाठ अपना लें।
 स्वच्छ रखें आस-पड़ोस और नदियाँ नाले।

 सदैव कूड़ा कूड़ेदान में ही डालें।
 प्रकृति से थोड़ा प्यार जता लें।

 मेरा सबसे बस यही कथन है।
इन आदतों को अपनाने का करना प्रयत्न है।

 बड़े भाग्य पाया यह मानस तन है।
 इसको स्वस्थ रखने का करना जतन है

 स्वास्थ्य ही धन है।
 वरना जीवन निर्जन वन है।

रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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