मेरा विद्यालय

यह है मेरा विद्यालय,
मुझको प्यारा मेरा विद्यालय।
कितना सुंदर इतना पावन,
हम सबको भाता मेरा विद्यालय।।
यहाँ आकर हम पाते नित्य ज्ञान निराले।
कभी हम पाते हैं भाषा से मेल जोल,
कभी हम पाते विज्ञान के ज्ञान अनमोल।।
कभी हम गणित के सवालों में उलझ जाते,
 कभी हम इतिहास के अतीत में खो जाते।
तो कभी हम खेल की दुनिया में हैं जाते।।
ऐसा है मेरा विद्यालय।
मुझको प्यारा मेरा विद्यालय।।
सदा स्वच्छ, साफ रहता मेरा विद्यालय।
शुद्ध जल, शुद्ध वातावरण से भरा मेरा विद्यालय।।
देखो कितना हरा भरा,
देखो कितना सजा धजा।
ऐसा है मेरा विद्यालय।
मुझको प्यारा मेरा विद्यालय।।
यहाँ निशुल्क शिक्षा, पुस्तकें और गणवेश हम पाते।
और साथ ही मध्यान्ह भोजन,।दूध व फल हमको भाते।।
शीत ऋतु में हैं मिलते स्वेटर।
साथ ही जूता और मोजे।।
ऐसा है मेरा विद्यालय।
मुझको प्यारा मेरा विद्यालय।।
महान शिक्षक हैं बड़े ज्ञानी,
जिन्होंने हमको सिखाने की है ठानी।
अच्छी शिक्षा पाकर बनते विद्वान,
जिससे अच्छे कर्म करके बनते महान।।
यह है मेरा विद्यालय,
मुझको प्यारा मेरा विद्यालय।
कितना सुंदर कितना पावन,
हम सबको भाता मेरा विद्यालय।।

रचयिता
दीपिका सक्सैना,
इं• अध्यापिका,
करेली की मढ़ैया,
विकास खण्ड-बनिया खेड़ा,
जनपद-संभल।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews