स्वास्थ्य दिवस

जनशक्ति हम देश के जनधन,
आओ खुद को स्वस्थ बनाएँ।
सात्विक और सरल जीवन से,
निज शरीर के रोग भगाएँ।

अपनी जरूरत भर ही केवल,
माँ प्रकृति से हम सब लेवें।
लालच की सीमा ही कहाँ है,
दोहन ना फिर हम कर देवें।

इस विलासिता के कारण ही,
होते रूग्ण सभी नर-नारी।
दें सम्मान प्रत्येक जीव को,
वरना पड़ेगा हम पर भारी।

योग और व्यायाम करेंगे,
सदविचार से मन को भरेंगे।
ऊर्जावान बनेंगे सब ही,
नवराष्ट्र निर्माण करेंगे।

स्वस्थ रहेंगे जब शरीर,
उसमें स्वस्थ मस्तिष्क बसेंगे।
देखादेखी हम न करेंगे,
स्वस्थ और संतुष्ट रहेंगे।

करें व्यवस्थित जीवन अपने,
लें प्रकृति से कुछ हम सीख।
ऋतुएँ, चंदा, सूर्य आदि सब,
सरल व्यवथा के हैं प्रतीक।

अस्त-व्यस्त न हो दिनचर्या,
यह ही है चिंता का शूल।
चिंता चिता तुल्य समझी है,
चिंता सब रोगों का मूल।

योग करे शरीर स्वस्थ और,
सेवा मन को सुंदर करती।
हरे कष्ट यह रोगों का और,
जीवन में नव स्फूर्ति भरती।

राग, द्वेष और मैं की होड़,
दूर कहीं हम देंगे छोड़।
स्वस्थ रहेंगे मस्त रहेंगे,
नहीं बनेंगे देश पे बोझ।

रचयिता
पूनम दानू पुंडीर,
सहायक अध्यापक,
रा०प्रा०वि० गुडम स्टेट,
संकुल-तलवाड़ी,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली, 
उत्तराखण्ड।

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