दीप जलाएँ

अब अभिनव दीप जलाएँ,
हम  नव  विश्वास  जगाएँ।।

शाश्वत शुभ चिन्मय  उज्जवल,
हो दिव्य प्रभा नव उदित विमल।
अँचल अँचल प्रतिपल झिलमिल,
अशुभ तिरोहित हो अवनी तल।
     अब मानवता बोध जगाएँ।

प्रीतिवर्ति स्नेहिल कर घृत पूरित,
सहृदय मानवता कर अभिसिंचित।
चिन्तन कर एकात्म भाव नित नित,
निर्भयता-समरसता  कर संचित।
        वह जय पथ रेख बनाएँ।

धर्म-मर्म शुचि  कर्म समझकर,
राष्ट्र भाव  नित  हृदयंगम  कर।
सकल अवनि हित में वंदन कर,
वैचारिकता  के पाट  विवर हर।
      जग हास आस विकसाएँ।
      अभिनव   दीप  जलाएँ।।

रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रभारी अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला, 
जनपद -सीतापुर।

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