मैं एक शिक्षिका हूँ
निकल पड़ती हूँ सुबह से
उसी जाने-पहचाने रास्ते पर,
नन्हीं सी टिमटिमाती आँखों में
सपने भरने के लिए मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
छोटे से विद्यालय में अपना
घरौंदा बनाकर प्रतिदिन,
जाने-अनजाने कितनी चुनौतियों
का सामना करती हूँ मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
अभिभावक सौंपते हैं अपने
नौनिहालों को मेरे हवाले,
उन्हीं की आशाओं पर खरा
उतरने की कोशिश करती हूँ मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
क, ख, ग, 1, 2, 3, 4 से रंग
भरती हूँ कैनवास पर,
चाॅक डस्टर से नित्य नई
कहानी रचती हूँ मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
भावी पीढ़ी को गढ़ने का
कार्य सौंपा गया है मुझे,
पूरी तन्मयता से फर्ज
अपना निभाती हूँ मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
मुझे स्वाभिमान है अपने
अध्यापन कार्य पर,
इसी पुनीत कर्म के खातिर
नित्य नई ऊर्जा से भर जाती हूँ,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
रचयिता
डॉ0 सुमन गुप्ता,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय कोट,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।
उसी जाने-पहचाने रास्ते पर,
नन्हीं सी टिमटिमाती आँखों में
सपने भरने के लिए मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
छोटे से विद्यालय में अपना
घरौंदा बनाकर प्रतिदिन,
जाने-अनजाने कितनी चुनौतियों
का सामना करती हूँ मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
अभिभावक सौंपते हैं अपने
नौनिहालों को मेरे हवाले,
उन्हीं की आशाओं पर खरा
उतरने की कोशिश करती हूँ मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
क, ख, ग, 1, 2, 3, 4 से रंग
भरती हूँ कैनवास पर,
चाॅक डस्टर से नित्य नई
कहानी रचती हूँ मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
भावी पीढ़ी को गढ़ने का
कार्य सौंपा गया है मुझे,
पूरी तन्मयता से फर्ज
अपना निभाती हूँ मैं,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
मुझे स्वाभिमान है अपने
अध्यापन कार्य पर,
इसी पुनीत कर्म के खातिर
नित्य नई ऊर्जा से भर जाती हूँ,
क्योंकि मैं एक शिक्षिका हूँ?
रचयिता
डॉ0 सुमन गुप्ता,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय कोट,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।

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