हमारी पृथ्वी

देखा दूर अंतरिक्ष से,
सबसे सुंदर अपनी पृथ्वी
जल है इस पर जीवन है
खूबियों से भरी अपनी पृथ्वी
जीने के हर संसाधन हैं
खुशियाँ देती हर पल पृथ्वी
रक्षा करो इसकी तन मन से
माँ समान है अपनी पृथ्वी
दे देती है अपना सब कुछ
दयामय है अपनी पृथ्वी
मानवीय हस्तक्षेप से देखो
प्रदूषित हो रही अपनी पृथ्वी
कुछ भी ना बचेगा यहाँ
यदि कुपित हो गई अपनी पृथ्वी
ध्यान रखो इसका मिलकर
स्वच्छ रहे अपने पृथ्वी
आओ मिलकर लें संकल्प
रक्षा करेंगे हम तेरी सुन पृथ्वी
सुधारेंगे हर मानवीय गलती
सजाएँगे तुझे हम सब 'ओ पृथ्वी'

रचयिता
मृदुला वैश्य,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मीठाबेल,
विकास खण्ड-ब्रह्मपुर,
जनपद-गोरखपुर।

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