विश्व विरासत दिवस
हर धरोहर अपनी निशानी लिए है,
हमारे अतीत की कहानी लिए है।
कहीं सदा वीरत्व दिखता रहा है,
कहीं रंग इतिहास छलका रहा है।
नये युग में गाथा पुरानी लिए है,
हर धरोहर अपनी निशानी लिए है।
कहीं पे संस्कृति मुस्कुराती दिखेगी,
कहीं पे विरासत कहानी लिखेगी।
कभी न मिटे वो रवानी लिए है,
हर धरोहर अपनी निशानी लिए है।
कहीं साक्ष्य बन कर हम ही से मिलाये,
कहीं वीरगाथा विजय की सुनाए।
रिवाजों से सजी काल-रानी लिए है,
हर धरोहर अपनी निशानी लिए है।
रचयिता
दीक्षा मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय असनी द्वितीय,
विकास खण्ड-भिटौरा,
जनपद-फतेहपुर।
हमारे अतीत की कहानी लिए है।
कहीं सदा वीरत्व दिखता रहा है,
कहीं रंग इतिहास छलका रहा है।
नये युग में गाथा पुरानी लिए है,
हर धरोहर अपनी निशानी लिए है।
कहीं पे संस्कृति मुस्कुराती दिखेगी,
कहीं पे विरासत कहानी लिखेगी।
कभी न मिटे वो रवानी लिए है,
हर धरोहर अपनी निशानी लिए है।
कहीं साक्ष्य बन कर हम ही से मिलाये,
कहीं वीरगाथा विजय की सुनाए।
रिवाजों से सजी काल-रानी लिए है,
हर धरोहर अपनी निशानी लिए है।
रचयिता
दीक्षा मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय असनी द्वितीय,
विकास खण्ड-भिटौरा,
जनपद-फतेहपुर।

👌 🙏
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