अल्फाज़ नहीं हैं पास मेरे

अल्फाज़ नहीं हैं पास मेरे
कि बता सकूँ तेरे प्यार को मैं
हज़ारों ग़लतियाँ, हज़ारों माफियाँ,
फिर भी हर वक्त तू है साथ मेरे।

सबसे बड़ी शख़्सियत तेरी
फिर भी तुझसे हट के ख्वाहिशें मेरी,
कैसे लिखूँ परिभाषा तेरी
प्रेम ही सच्ची भाषा तेरी।

मैं गिरूँ, मैं उठूँ, मैं लड़खडाऊँ,
मैं सम्हलूँ, मैं चलूँ मैं दौडूं...
तुझे खुद में समा के फिरुँ।
तेरा प्यार मेरा विश्वास
हम दोनों मिलकर एक हुए,
याद करने का बिसारने का तो ताता लगा है यहाँ,
पर गुंजाइश नहीं तेरे इश्क को रूह से रिहा कर सकूँ।

कोई तो शब्द मिलता जिसमें तू समा जाता ...
प्यार, विश्वास काश इनसे भी बड़ा शब्द कोई शायर बना पाता।

लोग सागर, बादल से करते तुलना तेरी,
पर इन्हें भी तो किसी मापक से है मापा जाता।

हे मसीहा, हे विधाता तू...
 अमूल्य, अतुलनीय, अविश्वसनीय है।
तू प्रेम है, नायक है, सहायक है।
प्यार का समन्दर बहता तेरे अंदर है।

अल्फ़ाज़ नहीं हैं पास मेरे
कि बता सकूँ तेरे प्यार को मैं।
हज़ारों गलतियाँ, हजारों माफियाँ
फिर भी हर वक्त तू है पास मेरे।
              धन्यवाद पिता परमेश्वर

रचयिता
मीरा कन्नौजिया,
प्राथमिक विद्यालय हरखपुर,
विकास खण्ड-सिकरारा, 
जनपद-जौनपुर।


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